फोटो-07एयूआरपी-4- जर्जर पड़ा शौचालय । संवाद
- फोटो : AURAIYA
सहायल(औरैया)। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले में ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त करना था। 2018-19 में कराए गए बेसलाइन सर्वे में मिले शौचालय विहीन परिवारों को प्रति शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये की धनराशि दी गई थी, जिसमे ग्राम पंचायत पौथी में कुल 325 शौचालय आवंटित हुए। आज भी हालत यह है कि गांव में शौचालय आधे-अधूरे पड़े हैं। इनमें से अधिकांश जर्जर हो चुके हैं जो गिरने की कगार पर है। इसी कारण से लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। फिर भी एमआईएस के आधार पर जिले को ओडीएफ कर दिया।
सहार ब्लॉक के ग्राम पंचायत पौथी व उसके मजरे करियापुर, मकापुरवा में लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी खुले में शौच से मुक्ति नहीं मिल सकी। पौथी के ग्रामीण सतेंद्र कुमार, दीपू शर्मा, बलबान, मुन्नू सिंह, ब्रजरानी ने बताया कि जो भी शौचालय प्रशासन द्वारा बनवाएं थे, वो गिरने की कगार पर है। कई शौचालय अभी अधूरे पड़े हैं। पड़ताल के दौरान पाया गया कि कई शौचालयों के दरवाजे टूट चुके हैं। जिसके चलते ग्रामीण व बच्चे खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। जिला प्रशासन भले ऐसे गांव को ओडीएफ घोषित करने की बात कह रहा हो, लेकिन हकीकत सरकार की मंशा की पोल खोल रही है।
ग्रामीण बोले
गांव की तारावती ने बताया कि प्रशासन के द्वारा बनवाये गए शौचालय आज भी अधूरे पड़े हैं। जिससे अभी तक शौचालय का लाभ उनको नहीं मिल पा रहा है, वो और उनका परिवार आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। ग्रामीण शांति देवी ने बताया कि उनका पूरा परिवार आज भी खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। उन्हें योजना के तहत शौचालय तो मिला लेकिन सोख्ता गड्ढा नहीं बना। जिससे शौचालय चालू नहीं हो सका और धीरे-धीरे जर्जर भी हो गया। ग्रामीण दीपू शर्मा ने बताया कि उनके गांव में शौचालय बनाने में घालमेल किया गया। यही कारण है कि किसी के गड्ढे नहीं बने तो किसी को दरवाजे नहीं लगाकर दिए गए। जिससे आज भी लोग खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं।
बोले जिम्मेदार
गांव में अधूरे शौचालयों की जानकारी हुई है। मामले की जांच करा कर रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी। जिन्होंने शौचालय में गड़बड़ी की है, उनके खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाए। - मुनीश कुमार, खंड विकास अधिकारी।