औरैया। प्रशासनिक अधिकारियों के लाख कोशिशों और मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद भी लगभग आठ सालों से बंद पड़े जिले में ब्लड बैंक की शुरुआत नहीं हो सकी है। इन आठ सालों में जिले के दौरे पर आए शासन, सत्ता के लोगों ने आश्वासन तो दिया लेकिन पहल नहीं हुई। पैथोलॉजिस्ट की तैनाती के साथ अन्य सुविधाओं के लिए 13 बार मांग पत्र शासन को भेजा जा चुका है।
शहर स्थित 50 शय्या जिला संयुक्त चिकित्सालय में रक्तदाताओं और समाजसेवियों की मांग पर वर्ष 2013 में ब्लड बैंक की शुरुआत हुई थी। उस समय पैथोलॉजिस्ट के पद पद डॉ. सुधीर कुमार की तैनाती हुई थी। ब्लड बैंक शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद पांच जून 2013 को डॉ. सुधीर कुमार का स्थानांतरण हो गया। स्थानांतरण के बाद ही ब्लड बैंक में रखा पांच यूनिट खून खराब होने की स्थिति में सैफई भेज दिया गया था। तब से आज तक इन आठ सालों में पर ब्लड बैंक शुरू कराने के प्रयास हर साल किए गए। जिसके लिए विभागीय अधिकारियों ने पैथोलॉजिस्ट की मांग को 13 बार स्मरण पत्र शासन को भेजा गया।
संचालन का ये दिला चुके भरोसा
जिले में निरीक्षण पर आए कानपुर कमिश्नर समेत कई अधिकारी व जिले के कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत, सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया, सदर विधायक स्व.रमेश दिवाकर ने ब्लड बैंक संचालन के लिए आश्वासन दिलाया था।
2019 में जगी थी उम्मीद
पिछले साल जून 2019 में उम्मीद जगी थी कि ब्लड बैंक संचालित हो जाएगा। मंत्रियों के आश्वासन के बाद कक्ष सालों बाद खुला था। मशीनों पर जमी धूल को साफ कराया गया था। कक्ष की पुताई हुई थी। खिड़कियां ठीक हुईं थीं। ऐसा लगने लगा था कि बस कुछ ही दिनों में पैथोलॉजिस्ट जिले में आने वाला है और ब्लड बैंक शुरू हो जाएगा। लेकिन 15 दिनों के प्रयास के बाद मामला फिर ठंडा हो गया और कोरोना के चलते मामला बिलकुल ठंडा पड़ा हुआ है।
ब्लड बैंक में रिक्त स्टाफ
पद संख्या रिक्त
पैथोलॉजिस्ट एक खाली
मेडिकल अफसर एक खाली
लैब टेक्नीशियन दो खाली
स्टाफ नर्स तीन खाली
काउंसलर एक खाली
सीएमओ बोलीं
सीएमओ डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि पैथोलॉजिस्ट के लिए डिमांड की फाइल शासन में पड़ी है। मामला विभाग के उच्चाधिकारियों के संज्ञान में हैं। पैथोलॉजिस्ट मिलते ही ब्लड बैंक शुरू होगा।
मुख्यमंत्री के संज्ञान में आया था ब्लड बैंक का मामला
वर्ष 2018 में ब्लड बैंक के संचालित होने की आवाज जोरों पर होने पर मंत्रियों के हस्तक्षेप से मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा था। उस दौरान तत्कालीन सीएमओ डॉ. एके राय ने लखनऊ में स्वास्थ्य संबंधी बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को जानकारी दी थी। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था लेकिन मामला फिर भी शांत हो गया।