फफूंद। जहां एक ओर लोग खेती करने से कतरा रहे हैं। वहीं महिलाएं इसे अपना कर स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन रही हैं। भाग्यनगर ब्लाक के कुतुबपुर की रहने वाली अनुपम ने घर पर पोषण वाटिका लगाई।
फायदा होने लगा तो कृषि वैज्ञानिकों से तकनीकी सीखी और आज वह वाटिका से निकलने वाली सब्जी से घर का खर्च चला रही है। इतना ही नहीं महिला सशक्तीकरण की मिसाल बनी अनुपम से गांव की 30 महिलाओं ने हुनर सीखा और आज वह भी पोषण वाटिका, किचन गार्डन, बोरी में बगिया लगा कर अपने पैरों पर खड़ी हैं।
कुतुबपुर की रहने वाली अनुपम बताती हैं कि घर के हालात अच्छे नहीं थे। पति मजदूरी करके परिवार का खर्च उठाते थे। ऐसे में उन्होंने कुछ करने की ठानी।
शुरुआती दिनों में सिलाई कढ़ाई का प्रशिक्षण लेकर सिलाई शुरू कर दी। इसी बीच कृषि विज्ञान केंद्र परवाह में खेती करने का प्रशिक्षण भी लिया। यहीं से उनके मन में जैविक खेती व सब्जियां उगाने का विचार आया।
वह स्वयं सहायता समूह में आजीविका सखी के रूप में जुड़ कर कार्य करने लगीं। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र में गृह वैज्ञानिक डॉ. रश्मि सिंह से किचन गार्डन के टिप्स लिए और घर में ही जैविक सब्जियां उगाने की तकनीकी सीखी।
इसके बाद घर पर पोषण वाटिका और किचन गार्डन तैयार कर सब्जियां उगाना शुरू कर दीं। बताती हैं कि आज उनकी रोज के खान पान से संबंधित जरूरतें पूरी होने लगीं।
कुछ सब्जियां लोगों को देकर बचत भी कर रही हैं। उनकी पोषण वाटिका को देख कर गांव की 30 महिलाएं उनसे जुड़ी और आज वह भी पोषण वाटिका, किचन गार्डन व बोरी का बगीचा लगा कर आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनी हैं।
अनुपम ने बताया कि उनका उद्देश्य लोगों को फल व सब्जियां उपलब्ध कराना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। ब्लाक मिशन प्रबंधक मुकेश कुमार ने बताया कि अनुपम आजीविका सखी के रूप में अपना पूर्ण दायित्व निभा रही हैं।
वहीं कृषि विज्ञान केंद्र के गृह वैज्ञानिक डॉ.रश्मि सिंह ने बताया कि अनुपम अपने कार्य के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और महिलाओं के लिए एक मिशाल बनी हैं।