फोटो-09एयूआरपी 18- सेहुद में जनता महाविद्यालय के बाहर आठ फिट का मैनपूठ नाला। संवाद
औरैया। दिबियापुर कस्बा में करीब तीन दशक पहले भट्टा बस्ती से गेल बिहार तक मैनपूठ का पक्का नाला बना था, उस वक्त बारिश के समय यहां नाले के जरिए जलनिकासी मिनटों में हो जाती थी लेकिन अब इस नाले की कब्जेदारों ने सूरत बिगाड़ दी है। अतिक्रमण से कहीं नाला आठ फीट का है तो कहीं पर महज दो से डेढ़ फीट ही रह गया है। कई जगह पर इसे पाट दिया गया है। इससे जलनिकासी अवरुद्ध हो गई है।
दिबियापुर कस्बा से सटे घेरा, कैंझरी व जमुहां में 200 बीघा खेत यूं ही नहीं डूबे हैं। किसानों का आरोप है कि यहां की सालों से हो रही जलनिकासी जिस मैनपूठ नाले से होती रही है वो दिबियापुर कस्बा से लेकर ककराही तक सिकुड़ा हुआ है जबकि सेहुद पहुंचते ही ये नाला चौड़ा हो जाता है। एक ही नाले का अलग-अलग जगह सिकुड़ना और फैलना जलनिकासी को अवरुद्ध कर रहा है। ऐसे में खेत डूबे हुए हैं। किसानों को इन खेतों में फसल उगाने का इंतजार पिछले छह साल से करना पड़ रहा है।
घेरा गांव निवासी नागेंद्र सिंह, बलवीर सिंह, जितेंद्र कुमार, आशीष पाल, मुकेश पाल का कहना है कि 200 बीघा खेत साल 2019 से जलमग्न हैं। यहां की जलनिकासी मैनपूठ नाले से होती है। फफूंद रोड से यह नाला क्राॅस होने के बाद औरैया रोड किनारे पहुंचता है। वहां से ककराही होते हुए सेहुद की ओर जाता है। फफूंद रोड से ककराही तक मैनपूठ नाला कई जगह पर महज दो से डेढ़ फीट का है। भट्टा बस्ती से लेकर ककराही तक मैनपूठ नाला अतिक्रमण की चपेट में है। लोगों ने मैनपूठ नाले पर अतिक्रमण करने के साथ ही इसे पाट भी दिया है।
मैनपूठ नाले सेहुद में पहुंचकर पर्याप्त आठ फीट का हो जाता है जबकि इससे पहले इस नाले की चौड़ाई महज दो से डेढ़ फीट है। पांच किमी के इस नाले पर आवास भवनों के निर्माण से लेकर प्रतिष्ठानों का घेरा भी नजर आता है। मैनपूठ नाले को अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर कोई जतन नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि 200 बीघा खेत डूबे हुए हैं। यदि मैनपूठ नाले की सुध ली जाए तो जलभराव की समस्या दूर हो पाएगी।
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कराया जाएगा काम
बारिश के बाद सिंचाई विभाग के दायरे में आने वाले नाले पर काम कराया जाएगा ताकि जलनिकासी को बेहतर बनाया जा सके।
-संजय कुमार, एक्सईएन सिंचाई विभाग