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Auraiya News: जाते साल के साथ कुछ ख्वाब पूरे तो कई अरमान अभी भी अधूरे

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औरैया। साल 2024 की विदाई हो रही है। यह साल जिले के विकास को लेकर अच्छा रहा। कुछ ख्वाब पूरे हुए, कुछ नए सपने भी देखते हुए उन्हें पूरा करने के लिए काम शुरू कराया गया है। वहीं, कुछ अरमान अभी भी अधूरे हैं। उन्हें प्राथमिकता मिली तो नए साल में बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जाएगा।
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फोटो28एयूआरपी 02- संचालन की बांट जोहती ट्रामा सेंटर की इमारत। संवाद
अधूरे अरमानों का एहसास करा रहा ट्रामा सेंटर और नेत्र चिकित्सालय
हाईवे से सटे भगौतीपुर में 2.64 करोड़ की लागत से ट्रॉमा सेंटर बनाया गया। मौजूदा साल में ट्रामा सेंटर में कुछ की तैनाती भी कागजों में दिखाई गई, लेकिन तीन साल बाद भी ट्रामा सेंटर का भवन संचालन के इंतजार में सफेद हाथी बना खड़ा है। बिधूना के राममनोहर लोहिया 50 शैया नेत्र चिकित्सालय का निर्माण सात करोड़ से किया गया। मौजूदा साल में यहां डॉक्टरों व अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई। साल बीत गया। संसाधनों के अभाव में नेत्र रोगियों की शल्य चिकित्सा बंद हैं।
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फोटो28एयूआरपी 03- सभी संसाधनों के साथ तैयार ब्लड बैंक। संवाद
फोटो28एयूआरपी 04- मेडिकल कॉलेज की इमारत। संवाद
मेडिकल कॉलेज ने दी सौगात
स्वास्थ्य महकमे के लिए साल 2024 की बड़ी उपलब्धि के तौर पर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू होने के साथ नई बिल्डिंग में ओपीडी व आपरेशन शुरू होना जरूरतमंदों के लिए सौगात की तरह रहा। बड़ी उपलब्धि के तौर पर 50 शैया जिला अस्पताल में ब्लड बैंक का लाइसेंस जारी होना और नए साल के तौफे में ब्लड बैंक शुरू होगा।
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फोटो28एयूआरपी 05- प्लास्टिक सिटी बहुरने में बाधक जर्जर सड़क। संवाद
प्लास्टिक सिटी का सपना 18 साल बाद भी अधूरा
ककोर समीप साल 2006 में प्लास्टिक सिटी को स्थापित करते हुए औद्योगीकरण को रफ्तार देने का सपना देखा गया था। साल 2024 में ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी होने पर सपने को पंख लगे। 18 साल बाद यहां तीन-चार कंपनियों के द्वारा इकाई तैयार करने का काम शुरू किया गया है। 2024 की विदाई के साथ सपना महज सपना है। वहीं, साल 2024 में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे को विकसित करने का सपना देख लिया गया है। 90 फीसदी जमीन खरीद का काम जिला प्रशासन ने कर लिया है। अब नए साल में इस दिशा में काम होंगे।

पर्यटन विभाग ने पहली बार खींचा विकास का खाका
इटावा से कटकर 1997 में जनपद बने औरैया को अभी तक ऑडिटोरियम नसीब नहीं हो सका है। पहली बार इसका खाका साल 2024 में खींचा। प्रस्ताव बनाकर पर्यटन विभाग ने शासन को भेजा है। प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प से लेकर देवकली मार्ग की रूपरेखा तैयार हुई। शहीद स्मार्कों को भव्य बनाने का कागजी खाका बनाया गया। नए साल में मंजूरी के साथ काम देखने को मिलेगा।
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दिबियापुर में नासूर बने जाम का निकाला हल
दिबियापुर नहर बाजार में अतिक्रमण हटाए जाने के साथ ही जर्जर पुल के बगल में नया पुल बनाने का काम शुरू किया गया। जनपद का मध्य बिंदु मौजूदा साल में संवर रहा है। नए साल में यहां की तस्वीर बदली नजर आएगी। दिबियापुर कस्बा के लिए साल 2024 के अंतिम माह काफी कुछ चौंकाने वाले रहे।

फोटो28एयूआरपी 06- समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा निर्माण। संवाद

लक्ष्य के सापेक्ष 90 फीसदी पूरा हो सका जल जीवन मिशन का काम जल जीवन मिशन के तहत 725 राजस्व गांवों को 375 कलस्टर में बांटते हुए टंकी व पाइप लाइन बिछाने का काम चल रहा था। 233 क्लस्टर तक ही पानी पहुंच सका है। 142 क्लस्टर से जुड़े गांवों को अभी भी पानी पहुंचने का इंतजार है। 150 क्लस्टर में पानी की टंकी से वाटर सप्लाई शुरू हुई है। 83 कलस्टर ऐसे हैं जहां टंकी का निर्माण नहीं हो सका है। सीधे बोरिंग से सप्लाई शुरू करा दी गई है। बचे हुए 142 कलस्टर में से 26 ऐसे हैं जहां किसी समस्या व विवाद की वजह से काम समय से शुरू नहीं हो सका है। नए साल में यह परियोजना पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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