औरैया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मयंक चौहान की अदालत ने वादी बहाबुद्दीन की प्रकीर्ण दीवानी अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपर सिविल जज जूडि बिधूना के सात अगस्त 2025 को पारित उस आदेश को पूरी तरह पुष्ट किया है। इस आदेश में वादी का अस्थायी निषेधाज्ञा से संबंधित प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया गया था।
तहसील क्षेत्र के गांव पुरवा रावत के निवासी वादी बहाबुद्दीन ने साहने आलम, अनवर और मुहम्मद हलीम के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का वाद दायर किया था। विचारण के दौरान, बहाबुद्दीन ने दावा किया था कि वह विवादित संपत्ति के मालिक और काबिज हैं। आरोप लगाया था कि प्रतिवादीगण उस पर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रतिवादी पक्ष ने इन दावों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वादी का विवादित संपत्ति पर कोई कब्जा नहीं है और न ही वह उसके मालिक हैं। अवर न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना।
अवर न्यायालय ने सात अगस्त 2025 को वादी का अस्थायी निषेधाज्ञा का प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ वादी ने जनपद न्यायाधीश के समक्ष प्रकीर्ण दीवानी अपील दायर की थी। जिला जज मयंक चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुना। उन्होंने अधीनस्थ न्यायालय के आदेश को विधि सम्मत माना। इसके बाद उन्होंने प्रकीर्ण सिविल अपील को खारिज कर दिया।