बिधूना। क्षेत्र के गांव रामपुर वामपुर के उन्नतशील किसान मोनू शाक्य लाल, पीली और हरी शिमला मिर्च की फसल से दो माह में दो लाख रुपये कमा चुके हैं। मोनू की यह तरक्की बताती है कि किसान कैसे आधुनिक तकनीकी की मदद से अपनी आमदनी को बढ़ा सकता है। मोनू की शिमला मिर्च इस समय दिल्ली तक जा रही है।
उन्नतशील किसानों में गिने जाने वाले मोनू शाक्य ने बताया कि कोरोना काल में फसल के अच्छे दाम नहीं मिले। काफी नुकसान भी उठाना पड़ा। तभी उन्होंने शिमला मिर्च खेती करने के तरीके सीखे। कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी ली। इसके बाद कानपुर से बीज लाकर अगस्त माह में नर्सरी तैयार की और बिना पॉली हाउस के खुले में पौधे तैयार किए। मोनू शाक्य ने बताया कि सितंबर के अंत और अक्तूबर माह के शुरुआत में पौधों की रोपाई की।
बताया कि बीच में बारिश होने की वजह से कुछ लागत बढ़ी। दिसंबर माह से मिर्च की पैदावार शुरू हो गई। करीब दो माह में वह चार लाख रुपये की मिर्च बेच चुके हैं। फसल तैयार करने में दो लाख रुपये की लागत आई थी। यह दो लाख रुपये यदि निकाल दें तो दो लाख रुपये शुद्ध मुनाफा हो चुका है। जबकि करीब दो लाख रुपये की फसल अभी बिकने के लिए बाकी है।
मोनू ने बताया कि शिमला मिर्च की मांग दिल्ली की बाजार में अधिक है। बड़े शहरों में यह मिर्च 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक बिकती है। पांच बीघे में हरी व एक बीघा में लाल व पीली शिमला मिर्च की फसल तैयार करके अब तक वह 150 क्विंटल मिर्च बेच चुके हैं। जैविक खाद के साथ हर मौसम में फसल तैयार करने की विधि वह सीख रहे हैं। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए उपाय भी अपना रहे हैं।
खुले में फसल तैयार कर पेश की मिसाल
प्रगतिशील किसान मोनू शाक्य ने बताया कि उनके खेतों की मिट्टी उपजाऊ है। इसलिए वह हर तरह की फसल उगाने की सोचते हैं। बताया कि शिमला मिर्च की फसल वैसे तो पॉली हाउस में की जाती है, जिससे तेज धूप, बारिश, हवा आदि का प्रभाव एक निश्चित स्तर तक ही रहेे, लेकिन उन्होंने एकदम खुले में फसल की। इसमें उन्हें कोई नुकसान नहीं हुआ।
अच्छी पैदावार हुई और समय से फल निकला। बताया कि पौधा दिसंबर से लेकर पूरे फरवरी माह तक मिर्च देगा। पांच बीघे में कुल दो लाख का खर्च आया है। अभी तक वह चार लाख से अधिक की मिर्च बेच चुके हैं, अभी और मिर्च बेचना बाकी है। इससे वह करीब दो लाख रुपये और कमाएंगे।