दिबियापुर। पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस फफूंद रेलवे स्टेशन से पहले सोमवार तड़के दुर्घटनाग्रस्त होने से बाल-बाल बच गई। रेल कर्मी इसका कारण ट्रेन में लगे एलएचबी कोचों को मान रहे हैं। रेल अधिकारियों का मानना है कि यदि पुरानी तकनीक के कोच लगे होते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
रेल अधिकारियों के अनुसार पिछले लगभग तीन वर्षों से पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में एलएचबी कोचों का उपयोग होता है। वर्तमान में भारत में निर्मित हो रहे जर्मनी की कंपनी लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) तकनीक से बने कोचों में कई खासियतें होतीं हैं। पुराने इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में निर्मित कोचों में एयर ब्रेक का इस्तेमाल होता है।
इसलिए ब्रेक लगाने पर काफी दूर जाकर रुकते हैं। वहीं एलएचबी कोचों में डिस्क ब्रेक का इस्तेमाल होता है। इसलिए ब्रेक लगाने पर बेहद कम दूरी में रुक जाती है। इसलिए यह ज्यादा सुरक्षित होते हैं। जबकि किसी दुर्घटना के दौरान आईसीएफ कोच के डिब्बे एक दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं। क्योंकि इसमें डुअल बफर सिस्टम होता है।
वहीं एलएचबी कोच दुर्घटना के दौरान एक दूसरे पर नहीं चढ़ते, क्योंकि इसमें सेंटर बफर कालिंग सिस्टम लगा होता है। इससे जान माल की हानि कम होती है। रेल कर्मियों का मानना है कि सोमवार की सुबह पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति के कोच से ट्रैक्टर के टकराने के बावजूद कोई बड़ा हादसा न होने में ट्रेन में लगे एलएचबी कोचों की सहभागिता प्रमुख रही।
ट्रेन ड्राईवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाए और तेज रफ्तार से नान स्टाप जा रही ट्रेन तुरंत ही रुक गई। यहां बता दें कि पूर्वोत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलने के बाद लगभग 440 किलोमीटर दूर कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर ही रुकती है।