औरैया। कहते हैं कि ईश्वर हर जगह नहीं हो सकता इसलिए उसने मां को बनाया लेकिन जब जीवन की राहें कठिन हों और संसाधन सीमित, तब यही मां एक योद्धा का रूप धारण कर लेती है। आज मदर्स डे पर हम बात कर रहे हैं उन साहसी महिलाओं की, जिन्होंने अभावों में रहकर बच्चों के सपनों को उड़ान दी। इन्होंने अपने बच्चों को अंधकार से बाहर निकालने के लिए खुद को संघर्ष की भट्ठी में तपाया।
पति के देहांत के बाद राजकुमारी ने संवारा परिवार, बेटों को बनाया डॉक्टर व इंजीनियर
दिबियापुर। कस्बा के मोहल्ला लोहिया नगर निवासी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम के पद से सेवानिवृत्त राजकुमारी यादव महिला सशक्तिकरण का उदाहरण हैं। 1975 में भरथना के गांव नगला पसी निवासी उनके पति महाराज सिंह यादव का निधन हो गया था। दिबियापुर से सटे गांव पूर्वा आशा की रहने वाली राजकुमारी अब स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हो गई है। उन्होंने बताया कि पति के निधन के बाद परिवार टूट गया था। दो बेटों और एक बेटी की जिम्मेदारी उनके सामने पहाड़ बनकर खड़ी हो गई थी लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
रामगढ़ के जिस स्कूल में बड़ा बेटा (डॉ. बृजेश यादव) पढ़ाई कर रहा था, वहीं उन्होंने भी दाखिला लेकर पढ़ाई की। बृजेश ने एमबीबीएस कर सर्जन हो गए। राजकुमारी की दोनों पुत्रवधू अछल्दा की ब्लॉक प्रमुख भी रहीं। राजकुमारी के घर में आज चार एमबीबीएस डॉक्टर हैं। छोटे बेटे कमलेश यादव अधिवक्ता होने के साथ राजनीति में भी सक्रिय हैं।
राजकुमारी की नातिन जोजो यादव ने आईआईटी दिल्ली से स्नातक पूरी कर नौकरी हासिल की। उनका एक पौत्र वर्तमान में अपने जिले के ही राजकीय मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। राजकुमारी को उनके इस संघर्ष के लिए राज्य सरकार सम्मानित भी कर चुकी है। (संवाद)
तानों के बीच रामलक्ष्मी ने बेटी आयुषी को बनाया क्रिकेटर
औरैया। कहते हैं अगर आपके हौसले बुलंद हो तो आप उन बुलंदियों पर भी पहुंच सकते हैं। जिसका सपना आपने देखा था। कुछ ऐसा ही कुछ सदर ब्लॉक के गांव भरसेन निवासी रामलक्ष्मी ने कर दिखाया। उन्होंने गांव के लोगों के तानों के बीच बेटी आयुषी सेंगर को क्रिकेटर बना दिया। वह वर्तमान में प्रदेश की अंडर-19 टीम का हिस्सा है।
बतौर मां रामलक्ष्मी के लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि वह छोटे से गांव भरसेन की रहने वाली है। पति की मृत्यु बेटी आयुषी के जन्म से महज 15 दिन पहले ही हो गई थी। इसको लेकर रिश्तेदार और गांव के लोग उसको और उसकी बेटी को तरह-तरह की बातें बोलकर ताने मारते थे। गांव के खेत-खलिहानों से लेकर औरैया शहर के स्टेडियम में बेटी को निरंतर अभ्यास कराया। कानपुर में भी आयुषी को बार-बार भेजा।
अंडर-19 टीम में जगह बनाने के लिए आयुषी को चार बार असफलता का मुंह भी देखना पड़ा थी लेकिन रामलक्ष्मी के हौसला बढ़ाने पर पांचवीं बार में आयुषी टीम में जगह बनाने में सफल हो गई। आयुषी अब यूनिवर्सिटी स्तर पर खेले जा रहे मैचों में बतौर कप्तान हैं। और बॉलिंग के जरिए अपना हुनर दिखा रही हैं। (संवाद)
फोटो-40- परिवार के साथ एएनएम पद से रिटायर हुई राजकुमारी। स्रोत:स्वयं