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स्वार्थ बुद्धिमान को बना देता है अज्ञानी

Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
Auraiya
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मुरादगंज (औरैया)। गांव हैदरपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य मनोज अवस्थी ने कहा कि निजी स्वार्थ में बुद्धिमान भी अज्ञानी बन जाता है। उन्होंने देवासुर संग्राम और कैकेई मंथरा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि देवासुर संग्राम में राजा दशरथ के रथ की सारथी कैकेई बनी थी। युद्ध के दौरान अचानक पहिये की कील निकल गई जिस पर कैकेई ने अपने हाथ की अंगुली का सहारा दिया। कैकेई के साहस से राजा दशरथ के प्राणाें की रक्षा हुई।
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उन्होंने कहा कि निजी स्वार्थ के कारण कैकेई पर अज्ञानता हावी हुई। जब मंथरा ने कैकेई से राम का राज्याभिषेक होने की बात की तो कैकेई ने अपने दोनों वरदान राजा दशरथ से मांगे। इस विनाशी कदम के कारण ही भगवान राम को वन में जाना पड़ा। अज्ञानता जीवन के लिए अमंगलकारी है जिससे जीव का चैन समाप्त हो जाता है।
उन्होंने संस्कारों के क्षरण होने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को संस्कारित शिक्षा देने के लिए ऋषियों और संतों की शरण में जाना चाहिए। राम, कृष्ण, अर्जुन ने संतों के सानिध्य मेें शिक्षा के साथ साथ संस्कारों का ज्ञान अर्जित किया। कार्यक्रम संयोजक विष्णु दयाल सविता और सर्वेश सविता ने सभी भक्तों से ईश्वर की कथा सुनकर जीवन को धन्य बनाने की अपील की है। इस कार्य में आलोक दुबे और गंगाराम सविता भी सहयोग कर रहे हैं।
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