फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गेल पाता में कंपनी के अधिकारियों को बंधक बनाकर लूटा

Sat, 31 Jan 2015 05:30 AM IST
Auraiya
विज्ञापन
विज्ञापन
दिबियापुर ( औरैया )। गेल पाता में काम करा रही लक्ष्मी कंपनी के अधिकारियों को कार समेत बंधक बनाकर बंधौरी के लिए मारपीट एवं लूटपाट की गई। आसपास के लोगों के पहुंचने पर अधिकारी किसी प्रकार बचकर फफूंद थाने पहुंचे। सीओ अजीतमल रमेश कुमार भारतीय ने पीड़ितों से मामले की जानकारी लेकर दिबियापुर सीएचसी में प्राथमिक उपचार कराया।
विज्ञापन

गेल पाता में वाटर ट्रीटमेंट के काम को लक्ष्मी कंपनी करा रही है। कंपनी के आरसीएम शिवा सुब्रह्मण्यम गेल विहार में रहते हैं, जबकि प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर विवेक फफूंद चौराहे पर स्थित होटल सिटी सेंटर में रह रहे हैं। शुक्रवार की सुबह दोनों लोग अपनी कार से गेल पाता जा रहे थे। इसी दौरान फफूंद चौराहे पर मिले मेघनाद यादव एवं रंजीत सिंह साथियों के साथ फफूंद चौराहे पर मिले। मेघनाद ने उनकी गाड़ी को रोका और अपने साथियों के साथ जबरन कार में घुस आए। आरोपी उनको कार समेत नगर से सटी नई बस्ती इंदिरानगर एक मकान में ले गए। यहां पर बंधक बनाकर मारपीट की।
आरोप लगाया कि लाखों रुपए बधौंरी के नाम पर मांगे गए। न देने पर दोबारा भी मारपीट की गई। आरोपियों ने दोनों कंपनी अधिकारियों से मोबाइल एवं 10 हजार रुपये नकदी लूट ली। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग पहुंच गए। इस पर सभी आरोपी धमकाते हुए भाग खड़े हुए। फफूंद थाने पहुंचे कंपनी के दोनों अधिकारियों से सीओ रमेश कुमार भारतीय ने पूछताछ की। साथ ही पीड़ितों को दिबियापुर सीएचसी में उपचार के लिए भेजा। सीओ का कहना है कि मामला फफूंद थाने में आईपीसी की धाराओं 342,392 में पंजीकृत कर लिया गया है।
विज्ञापन

सीओ ने बताया कि मेघनाद यादव प्राइवेट कंपनी लक्ष्मी का लोकल कांट्रेक्टर है। आरोपियों ने कंपनी अधिकारियों से पिछला बकाया 50 हजार रुपए मांगने के लिए मारपीट अवश्य की। परंतु बंधौरी मांगने जैसा कोई मामला संज्ञान में नहीं आया है। यहां बता दें कि मेघनाद यादव के खिलाफ दिबियापुर थाने में शुक्रवार की सुबह बालिका विद्यालय प्रबंधक की कार पर हमला करने का मुकदमा भी दर्ज हुआ है। इस मामले में मेघनाद को शांतिभंग में निरुद्ध किया गया है। गौरतलब है कि पहले भी गेल पाता में काम करा रही विभिन्न कंपनियों के अधिकारियों को बंधौरी के लिए परेशान करने एवं बंधक बनाने के मामले प्रकाश में आते रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें