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भूखों को खाना, जरूरतमंद को दवा व कपड़ों का दान

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कोंच। महंगाई के इस दौर में जहां लोगों को घर आए मेहमान को ही खाना खिलाना अखरता है, वहीं कोंच में कार्य कर रही दरिद्र नारायण सेवा समिति रोजाना 150 से 200 गरीबों को बगैर किसी सरकारी सहायता के भोजन करा रही है। समिति की लोकप्रियता ऐसी है कि लोग पूर्वजों की पुण्यतिथि और प्रियजनों के जन्मदिन पर गरीबों को भोजन कराने के लिए भी समिति के पास ही आते हैं। समिति से जुड़े लोगों की समाजसेवा देखकर इलाके के धनाढ्य वर्ग ने अपना सहयोग देना शुरू कर दिया है। यही वजह है कि समिति अब भूखों को खाना खिलाने के साथ साथ जरूरतमंद निर्धन लोगों को दवाएं भी उपलब्ध कराने लगी है।
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करीब दस साल पहले नगर के समाजसेवियों ने ‘दरिद्र नारायण सेवा समिति’ के नाम से समिति का गठन किया था, समिति का मकसद था कि नगर के ऐसे लोगों को पेट भर भोजन कराना था, जो शारीरिक अक्षमता के कारण कुछ कमाई नहीं कर सकते हैं। इनमें ऐसे बुजुर्गों को प्राथमिकता दी गई जिन्हें उनके अपनों ने ही दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया है।

नगर पालिका से रिटायर्ड कर्मचारी कढोरेलाल यादव को संयोजक बना कर समिति ने काम को आगे बढ़ाया और रेलवे भर्ती बोर्ड के अवकाश प्राप्त चेयरमैन प्रेमनारायण वर्मा ने उनका साथ दिया। शुरुआत प्रेमनारायण ने दिवंगत पिता छेदीलाल ठेकेदार की पुण्यतिथि 10 दिसंबर 2008 पर निराश्रितों, विकलांगों और गरीबों के लिए दस दिन की भोजन व्यवस्था के साथ किया। इसके बाद श्री धर्मादा रक्षिणी सभा की ओर से संचालित बलदाऊ धर्मशाला में गरीबों के लिए भोजन की पांत होने लगी।
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धीरे-धीरे नगर के सैकड़ों हाथ इन गरीबों को भोजन कराने के लिए आगे बढ़ने लगे। कोई अपने किसी प्रियजन की पुण्यतिथि तो कोई अपनी शादी की सालगिरह या बच्चों के जन्मदिन इन्हीं गरीबों के बीच आकर मनाने लगे। जिससे उन्हें आत्मिक शांति मिलती है और गरीबों के पेट भरने लगे। आज इस समिति को दस साल हो गए और अपनी अब तक की इस यात्रा में वह रोजाना 150 से 200 गरीबों को भोजन कराती आ रही है।

खास बात यह है कि जो गरीब दिव्यांग हैं और चल कर समिति के भवन तक नहीं पहुंच सकते हैं उनके घरों पर टिफिन में भोजन भेजा जाता है। हैरत की बात तो यह है कि अब समिति का स्वयं का खर्च काफी कम हो गया, धनी वर्ग के लोग स्वयं ही पुण्य कमाने के लिए समिति के पास चलकर आने लगे हैं।

-आखिरी सांस तक चलेगी बाबूजी की समाजसेवा
समिति की नींव रखने वाले कढोरेलाल यादव जिन्हें प्यार से लोग बाबूजी कह कर बुलाते हैं नगर पालिका सें बतौर कैशियर 2005 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद जब समाजसेवा की भावना मन में जागृत हुई तो सबसे पहले नगर में संपन्न लोगों के सामने स्वयं ही हाथ फैलाकर पुराने कपड़े एकत्रित किए और चीथड़ों में बसर करने वाले गरीबों के तन ढकने का काम किया। इसके बाद समाज के अन्य लोग उनके साथ जुड़ते चले गए और कारवां बनता गया। आज न केवल सेवानिवृत्त शिक्षक, अधिवक्ता, चिकित्सक इस संस्था में अपनी सेवाएं देने को प्रस्तुत रहता है बल्कि जिले में आने वाले तमाम प्रशासनिक अधिकारी समिति के भवन में पहुंच कर संस्था का उत्साह बढ़ाते हैं। बाबूजी का कहना है कि जब तक शरीर में आखिरी सांस रहेगी, तब तक उनकी समाज सेवा भी लोगों की मददगार रहेगी।

-दानियों ने हाथ बढ़ाकर बनवा दिया भवन
यहां के एक दानवीर महंत ब्रजभूषण दास एडवोकेट ने समिति को गांधीनगर इलाके में 55 डेसीमल भूमि दान कर दी है। समिति के संयोजक कढोरेलाल यादव, सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. वीरेंद्रसिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक देवेंद्र द्विवेदी, प्रताप नारायण तिवारी लल्ला, रामराजा निरंजन और समाजसेवी हाजी सेठ नसरुल्ला ने इस वृद्घाश्रम की स्थापना के लिए शुरुआती योगदान में अपने परिजनों की स्मृति में एक एक कमरे का निर्माण करा कर वृद्घाश्रम की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर दिया। अब वहां एक अच्छा भवन आकार ले चुका है। भंडारे का कार्य भी अब नए निजी भवन में होने लगा है।

- शादी और अंतिम संस्कार भी कार्यों में शामिल
संस्था दरिद्र नारायण सेवा समिति अपने सेवा प्रकल्पों का दायरा बढ़ाती जा रही है। समिति के संयोजक कढोरेलाल यादव बताते हैं कि हर साल एक गरीब कन्या का विवाह भी समिति करती है। इसमें नगर के पूंजीपतियों की मदद ली जाती है। इसके अलावा किसी गरीब की जब मृत्यु हो जाती है तो समिति के एक सदस्य गजराज सिंह सेंगर उसके क्रियाकर्म के लिए अपनी जेब से डेढ़ हजार रुपये देते हैं। संस्था अपने खर्चे पर अनाथ बच्चों को पढ़ाने लिखाने की योजना भी बना रही है।
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10 साल से कोंच में बिना किसी सरकारी सहायता से गरीबों की मदद में जुटी है दरिद्र नारायण सेवा समिति
अमर उजाला ब्यूरो
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