फफूंद। औरैया जनपद के सबसे पुराने कस्बे में शुमार फफूंद को अब भी स्वास्थ्य की बेहतर सेवा नसीब नहीं है। फफूंद नगर पंचायत क्षेत्र में अब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नहीं बन सका। यहां की 40 हजार की आबादी एक पीएचसी के ही भरोसे है, जिसमें एक अदद एमबीबीएस डॉक्टर की भी तैनाती नहीं है। लोगों को इलाज के लिए दिबियापुर,अजीतमल व औरैया की दौड़ लगानी पड़ती है।
फफूंद कस्बा में सपा, बसपा और लगभग सात वर्षों से भाजपा के शासन काल में लोग सीएचसी की मांग कर रहे हैं। नगर पंचायत अध्यक्षों व कस्बाई नेताओं और समाजसेवियों के अथक प्रयासों के बावजूद कस्बे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित नहीं हो पा रहा है।कस्बे के बाशिंदों का कहना है कि एक तरफ अछल्दा, सहार, अयाना और एरवाकटरा जैसे छोटे कस्बों में लोगों को सीएचसी सेवाएं मिल रही हैं। जबकि आजादी से पूर्व की नगर पंचायत में अब तक सीएचसी का ना होना यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा बयान करने के लिए काफी है।
इनसेट
बुखार का इलाज भी मुश्किल
फोटो29एयूआरपी 04- सिंटू दीक्षित। संवाद
भैंसोल निवासी सिंटू दीक्षित का कहना है कि फफूंद कस्बे के आसपास के तमाम गांव के लिए कस्बे तक आने जाने के लिए पक्की सड़कें बनी होने से लोगों को इलाज के लिए पहुंचने में सहूलियत तो महसूस होती है, लेकिन सीएचसी न होने से बुखार जैसी साधारण बीमारी का भी इलाज नहीं मिल पाता है। लोग औरैया, इटावा कानपुर जाने को मजबूर हैं। वहीं प्रसूताओं को भी दिबियापुर, अच्छल्दा, औरैया जाना पड़ता है। कस्बे में अस्पताल बनना बहुत जरूरी है। शासन प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
फफूंद के पांच किमी दायरे के लोग परेशान
फोटो29एयूआरपी 05- गिरधर भक्त मिश्र। संवाद
गांव बरौआ निवासी किसान नेता गिरधर भक्त मिश्र का कहना है कि फफूंद के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में सैकड़ों गांव हैं। यहां के लोग इलाज के लिए फफूंद जाते हैं। सीएचसी न होने से लोगों को इधर-उधर भागना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत सड़क दुर्घटना में घायल हुए लोगों को होती है। उन्हें एंबुलेंस या निजी वाहन से दिबियापुर या औरैया ले जाया जाता है। जब तक हालत और नाजुक हो जाती है। कस्बे में अस्पताल होने से घायलों को समुचित उपचार भी मिल सकता है। गंभीर अवस्था में वो जल्द रेफर किए जा सकते हैं।
सड़क दुर्घटना ज्यादा, इलाज की सुविधा कम
फोटो29एयूआरपी 06- मोहन दीक्षित। संवाद
फफूंद कस्बे के निवासी व्यापारी मोहन दीक्षित का कहना है कि कस्बे से बिधूना, अछल्दा, दिबियापुर, पाता, औरैया, ककोर, बाबरपुर, अजीतमल जाने वाले सड़क मार्ग पर अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं। फफूंद में सिर्फ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है, जो समय पर खुलता और बंद होता है। अगर सुबह या शाम और देर रात में कोई दुर्घटना हो जाए तो घायल को 10 से 20 किलोमीटर की दूरी पर बने सीएचसी पर ले जाया जाता है। समय लगने से कई घायलों की हालत नाजुक हो जाती है कुछ लोग तो दम भी तोड़ देते हैं।