अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। बसपा के टिकट बंटवारे में राय मुशायरा न लेने से नाराज बसपा के पूर्व मंत्री रामजी शुक्ला व उनके पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि ने जब अपना प्रत्याशी उतारा तो बसपा ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। मगर अब हालत यह है कि पार्टी के पास बड़ा ब्राह्मण चेहरा जिले में नहीं है। पूर्व विधायक शेखर तिवारी के जेल जाने के बाद बड़ा चेहरा रामजी शुक्ला व उनके भाई लाल जी ही थे। अब बसपा के पास दिबियापुर से पूर्व प्रत्याशी रामकुमार अवस्थी ही एक मात्र चेहरा है।
ब्राह्मण भाईचारा की बदौलत जिस बसपा ने एक बार प्रदेश की सत्ता पूर्ण बहुमत से हासिल की। वहीं ब्राह्मण नेतृत्व की अब पार्टी में कमी हो रही है। पार्टी के कद्दावर विधायक रहे शेखर तिवारी इंजीनियर हत्याकांड में जेल में हैं। जिसके चलते पूर्व मंत्री रामजी शुक्ला व उनके पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि भाई लाल जी शुक्ला ही बसपा के लिए जिले में ब्राहमण चेहरा थे। मगर जब निकाय चुनाव में टिकट वितरण में राम जी शुक्ला व लाल जी शुक्ला को नहीं पूछा गया तो उन्होंने पालिका सीट पर अपना प्रत्याशी उतार दिया। जिस पर बसपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया।
रामजी व लाल जी ने अपनी ताकत दिखाकर अपना प्रत्याशी अप्रत्याशित मतों से जितवा लिया। यहां बसपा की जमानत जब्त हो गई। मगर अब संगठन के पास ब्राह्मण चेहरे की कमी है। महज दिबियापुर से पूर्व प्रत्याशी रामकुमार अवस्थी ही बसपा के पास चेहरा बचे हैं। बसपा जिलाध्यक्ष इंद्रेश शाक्य हार की समीक्षा करने की बात कह रहे हैं।