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बंदरों ने कई को काटा, स्कूल पर मंडराते

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मुहम्मदाबाद। डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद गांव में बंदरों को आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। स्थिति यह है कि एक हफ्ते में बंदर करीब दस लोगों को अपना निशाना बना चुके हैं। अब तो बंदर सड़क चलते लोगों को भी काटने लगे हैं। समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीण अधिकारियों के भी चक्कर काट चुके हैं और वन विभाग की टीम निरीक्षण भी कर चुकी है। लेकिन आतंक है कि कम होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है।
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बता दें कि पिछले करीब एक माह से गांव में बंदरों आतंक बना है। बंदर कभी किसी घर के छत तो कभी छज्जों में झुंड की शक्ल में नजर आते हैं। इससे पूरे घर में महिलाओं और बच्चों के बीच चीख पुकार मच जाती है। आसपास के लोग लाठी-डंडे लेकर दौड़ाते हैं लेकिन तब तक बंदरों का झुंड दूसरे मकान पर पहुंच जाता है। बंदरों को खौफ इस कदर है कि इस बार होली पर महिलाओं ने छतों पर पापड़ चिप्स भी नहीं बनाए।

दो दिन पहले गांव निवासी शशिकांत की छह साल की बेटी गुड़िया घर से बाहर खेल रही थी। तभी बंदर ने उसे बुरी तरह काट लिया जिससे बच्ची का हाथ लहूलुहान हो गया। इसी तरह रविवार शाम बुजुर्ग हीरालाल घर के बाहर चारपाई पर बैठे थे तभी बंदरों के झुंड ने उन्हें निशाना बनाकर हीरालाल का पैर चबा लिया। बीते दस दिन में बंदर करीब आठ से दस लोगों को अपना निशाना बना चुके हैं।
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अब तो स्थिति यह है कि बंदरों को झुंड स्कूलों में भी घुसने लगा है। गांव के प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग में सोमवार को बंदरों ने धावा बोला था। जिससे बच्चों में चीख पुकार मच गई। आनन-फानन में बच्चों को स्कूल से बाहर निकाला गया और आसपास के लोग बंदरों को खदेड़ने में जुट गए। ग्रामीण रामसेवक, राजकुमार, प्रागनारायण, विक्रम, सुनील पाठक, मीरा, जाबिया आदि ने बताया कि कुछ दिन पहले गांव मे वन विभाग की टीम भी आई थी लेकिन सिर्फ निरीक्षण कर ही लौट गई थी।

दो एक दिन में ग्रामीण जिलाधिकारी से मिलकर बंदरों से निजात दिलाने की मांग करेंगे। प्रधान सुनीता तिवारी का कहना है कि वन अधिकारियों ने पिंजड़ा लगाकर बंदरों को पकडने की बात कही थी। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। लिहाजा वन अधिकारियों से मिलकर पिंजड़े की मांग रखी जाएगी।
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मुहम्मदाबाद में ग्रामीण खौफजदा, स्कूल की छत पर मंडराते रहते हैं बंदर
अमर उजाला ब्यूरो
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