अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। मौसम विभाग खुद को भले ही हाईटेक बना चुका हो मगर उसके आकलन फेल हो गए हैं। इस बार मौसम विभाग अच्छी बारिश का दावा कर रहा था जो फेल हो गया, जबकि घाघ की कहावतें पास हो गई हैं।
घाघ की कहावत में है कि चैत वर्षा आई और सावन सूख जाई व एक बूंद जो चैत में परे सहस बूंद सावन की हरे। इस बार यही हुआ। चैत (मार्च-अप्रैल) में जिले में बारिश हो गई। जिले में यह बारिश चार मिमी रिकार्ड की गई, जबकि सेंट्रल यूपी में बारिश आठ मिमी तक दर्ज हो गई। किसानों को इसी से चिंता सता रही थी कि अब बारिश इस साल कम होगी। मगर मौसम विभाग फिर भी दावा कर रहा था कि आगे अच्छी और झमाझम बारिश होने के आसार हैं।
किसान भी मौसम विभाग के दावे पर अच्छी बारिश की आस लगाए बैठे थे। मगर सावन के महीने में विभाग 250 मिमी की बारिश की बात कह रहा था तो महज 100 से 120 मिमी ही बारिश सावन में हो पाई। अभी तक कुल मिलाकर जिले में 248 मिमी बारिश मौसम विभाग ने रिकार्ड की। मौसम विभाग अपने सभी आंकड़े फेल होने के बाद भी बारिश का दावा कर रहा था। मगर उसके दावे रोज बेकार साबित होते चले जा रहे थे।
घाघ की कहावत है कि दिन में गर्मी रात को ओस, कहै घाघ वर्षा सौ कोष। इसमें घाघ का कहना है कि यदि दिन में गर्मी और रात को ओस पड़े तो वर्षा की कोई आशा नहीं है। अभी तक घाघ की कहावतों पर ही मौसम की चाल चली है तो किसानों ने अब पानी की आस छोड़ दी है। सितंबर में मौसम विभाग अभी भी कुछ बारिश के संकेत की बात कह रहा है।
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मौसम विभाग हटा रहा आंकड़े
खुद पर विश्वास हटता देख मौसम विभाग अब अपने आंकड़े वेबसाइट से हटाने लगा है। आगे आने वाले दिनों में फिलहाल कोई बड़ा दावा भी विभाग नहीं कर रहा है।
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इस बार मौसम विभाग के आंकड़े फेल हुए हैं। अब आंकड़े फेल हो गए तो कह भी सकते हैं कि कहावतें पास हो गईं। फिलहाल अभी बारिश का कोई अनुमान नहीं है। - संदीप कुमार, मौसम विशेषज्ञ - कृषि विज्ञान केंद्र