बीते डेढ़ माह से अपराध से सुलग रहे प्रयागराज को कुछ अफसरों की लापरवाही का नतीजा भुगतना पड़ रहा है। बीते 24 घंटे से प्रयागराज में हालात बेहद संवेदनशील हैं, इंटरनेट सेवाओं पर रोक बरकरार है।
उमेश पाल हत्याकांड के बाद हर कदम पर प्रयागराज कमिश्नरेट की लगातार चूक का नतीजा अतीक और अशरफ की हत्या के रूप में सामने आया जिसने पूरे प्रदेश ही नहीं, देश भर को झकझोर कर रख दिया।
प्रयागराज में कमिश्नरेट के गठन के बाद पुलिस मानों अतीक और उसके गिरोह को भूल गई थी। जिले के सबसे अहम गवाह की सुरक्षा में चूक उसे भारी पड़ गई। इस हत्याकांड में दो पुलिसकर्मियों की मौत ने विभाग को भी सकते में डाल दिया था।
उमेश पाल हत्याकांड में शामिल शूटर 24 घंटे तक जिले में मंडराते रहे। पुलिस की सक्रियता में चूक की वजह से सभी आसानी से फरार भी हो गए। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन के नामजद होने के बावजूद उसे समय रहते गिरफ्तार नहीं किया गया।
इससे शाइस्ता को फरार होने का मौका मिल गया। इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए रखने वाले कुछ पुलिस अफसरों को अतीक के एक ठिकाने पर प्रयागराज पुलिस के जल्दबाजी में छापे मारकर हथियार और नगदी बरामद करना भी सही कदम नहीं लगा।
वहीं, अतीक और अशरफ को प्रयागराज लाने के बाद सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त नहीं किए गये। नतीजतन, शनिवार रात प्रयागराज मेडिकल कॉलेज में हुई वारदात ने प्रदेश पुलिस के इंतजामों पर सवालिया निशान लगा दिया। इन सवालों का जवाब अब उसे कई जगहों पर देना होगा।
दागियों को हटाया, लापरवाह रहे कायम
उमेश पाल हत्याकांड के बाद प्रयागराज में किसी भी पुलिस अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। बीट सिपाही से लेकर कमिश्नर तक को सुरक्षित किया जाता रहा। कुछ पुलिसकर्मियों को अतीक का करीबी बताकर जिले से बाहर जरूर किया गया लेकिन जिन्होंने लापरवाही बरती, उनके खिलाफ सही समय पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।