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यूपी: दंगे के बाद लगाई हथियारों की फैक्ट्री!

Wed, 18 Sep 2013 01:22 AM IST
अमर उजाला, आगरा
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उत्तर प्रदेश में आगरा के कागारौल के नगला परमसुख में पुलिस ने छापा मारकर हथियार बनाने की अवैध फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया। खेत में बनी झोपड़ी में एक माह से तमंचे, रायफल और पौनिया जैसे हथियार बनाए जा रहे थे।
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गांव का हेमा फैक्ट्री संचालित कर रहा था। पुलिस ने मौके से सात कारीगरों को गिरफ्तार कर निर्मित-अर्धनिर्मित हथियार और हथियार बनाने के उपकरण बरामद किए हैं।

नगला परमसुख में हेम सिंह पुत्र गंगाधर के खेत में अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री संचालित होने की पुलिस को जानकारी मिली थी। इस पर कागारौल एसओ शैलेंद्र सिंह ने टीम के साथ सोमवार को छापा मारकर सात लोगों को हथियार बनाते दबोच लिया, जबकि सरगना हेमा फरार हो गया।
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पकडे़ गए लोगों में बच्चू सिंह पुत्र रतन सिंह, जागन सिंह पुत्र भीमसेन, सुभाष पुत्र बच्चू सिंह, रवि पुत्र जागन सिंह निवासीगण चांडी थाना कागारौल, सोनू पुत्र दौजी निवासी सींगना थाना सिकंदरा, कलुआ पुत्र राजवीर निवासी समोगर थाना डौकी, रणवीर पुत्र देवेंद्र सिंह निवासी नगला परमसुख शामिल हैं।


एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि झोपड़ी से आठ तमंचे 315 बोर, एक रायफल दुनाली 315 बोर, असलहा बनाने का सामान बैरल, चाप, शिकंजा, अर्द्ध निर्मित दो तमंचे 315 बोर, एक रायफल 315 बोर और रायफल की बट बरामद किया गया है।

पकड़े गए सभी लोग हथियार बनाने के कारीगर हैं। गिरफ्तार जागन सिंह ने पुलिस को बताया कि एक तमंचा 400 रुपये में तैयार करके देते हैं। एक दिन में एक तमंचा तैयार कर लिया जाता है।

पुलिस ने बताया कि जागन तमंचा बनाने में माहिर है। वह पहले भी जेल जा चुका है। हथियारों की बिक्री का काम हेमा सिंह करता था। खेत में तकरीबन एक माह से हथियार बनाए जा रहे थे।

यहां से आगरा सहित आसपास के जनपदों में हथियारों की सप्लाई की जाने की आशंका है। पुलिस इसकी जांच में जुटी है।

दंगे के बाद लगाई फैक्ट्री!
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में सामने आया है कि मुजफ्फरनगर में दंगे के बाद अवैध हथियारों की मांग में इजाफा हुआ है। इसके चलते ही फैक्ट्री में हथियारों के कई कारीगरों को लगाकर काम कराया जा रहा था।

एक दिन में छह से ज्यादा तमंचे और रायफल बनाई जा रही थीं। ऐसी भी आशंका है कि दंगे में यहां से हथियारों की सप्लाई की गई हो। फिलहाल इसकी जांच की जा रही है। पकड़े गए सभी लोग आपस में रिश्तेदार हैं। इसके चलते अवैध धंधे की खबर किसी को नहीं मिल पाती थी।

ऐसे बनता है तमंचा
बाइक से निकला हैंडिल का पाइप 12 बोर और 315 बोर के तमंचा बनाने में इस्तेमाल होता है। ठोंक पीटकर उसे इस साइज का आकार दे दिया जाता है। इससे तमंचे की नाल तैयार हो जाती है। भट्ठी में डालकर उसे तपाया जाता है। फ्रेम की भी मदद ली जाती है।

इसके बाद उसमें बट और ट्रिगर को फिट किया जाता है। अलग-अलग आरोपी हथियारों को आकार देने का काम करते थे। कारतूस को भी नाल में फंसाकर चेक किया जाता है। हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान छीपीटोला और बेलनगंज के कबाड़ी बाजारों से लाया जाता है।
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