बिजनौर में ग्राम पंचायत मोटाढाक के सैकड़ों ग्रामीणों ने सामूहिक इच्छा मृत्यु का अधिकार देने की राष्ट्रपति से मार्मिक अपील की है। विभिन्न चुनौतियों से जूझ रहे यूपी के चार सीमांत गांवों के ग्रामीणों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर उपेक्षा की दास्तां बयां की है।
ग्राम पंचायत मोटाढाक के गांव मोटाढाक, चतरूवाला, देवेंद्र नगर कौड़िया और तेलीपाड़ा के ग्रामीण आजादी के बाद से अब तक उपेक्षित हैं। ग्राम प्रधान अनीता दुदपुड़ी समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने राष्ट्रपति को 32 पृष्ठों का ज्ञापन भेजा है। जिसमें चारों गांवों में रहने वाले ग्रामीणों के चुनौतीपूर्ण जीवन और उपेक्षा की दास्तां बया की है।
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत मोटाढाक तीन ओर से घने जंगल से घिरी है। यूपी के होने के बाद भी उन्हे बिजली, पानी, सिंचाई, स्वास्थ्य, स्कूल, दूरसंचार, पेंशन, बैंक आदि सुविधाएं कोटद्वार (उतराखंड) से उपलब्ध होती हैं। वर्ष 1970 से उतराखंड से बिजली मिल रही है। उतर प्रदेश विभाजन के बाद से उतराखंड शासन द्वारा पंचायत के अवशेष उपभोक्ताओं को विद्युत कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उतराखंड शासन, उतर प्रदेश के चारों सीमांत गांवों की विद्युत आपूर्ति पर जल्द ही विराम लगाने जा रहा है। बिजली बगैर जीवन यापन करना चुनौतीपूर्ण ही नहीं असंभव हो जाएगा। ग्रामीणों ने इन परिस्थितियों को झेलने से पहले चारों गांवों के ग्रामीणों को सामूहिक इच्छा मृत्यु का अधिकार देने की राष्ट्रपति से मार्मिक अपील की।
प्रधान संगठन उतर प्रदेश की वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनीता दुदपुड़ी ने ग्रामीणों की सहमति पर सामूहिक इच्छा मृत्यु के लिए 15 अगस्त का दिन निर्धारित करने की अपील की है। ग्राम प्रधान का कहना है कि आजादी के बाद से आज तक उन्हें यह एहसास नहीं हो सका कि वे वास्तव में आजाद भारत के नागरिक हैं।