भ्रष्टाचार के खिलाफ देश भर में अलख जगाने वाले ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ से अन्ना हजारे ने नाता तोड़ लिया है। आगे की लड़ाई ‘जनतंत्र मोर्चा’ के बैनर तले चलेगी जो अन्ना का नया संगठन है।
अन्ना ने उत्तर प्रदेश के बरेली में इसका खुलासा करते हुए बताया कि ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ को लेकर उठापटक हो रही थी। उनके नाम का दुरुपयोग किया जा रहा था इसलिए उन्होंने उससे किनारा कर लिया। उनके नए संगठन ‘जनतंत्र मोर्चा’ में न कोर कमेटी होगी न कोई पदाधिकारी। सिर्फ वालंटियर होंगे।
जनतंत्र यात्रा के पांचवें चरण में अन्ना हजारे बुधवार को बरेली पहुंचे थे। बृहस्पतिवार को बदायूं रवाना होने से पहले वह मीडिया से रूबरू हुए। अपने आंदोलन में शुरुआत जैसा माहौल न होने के सवाल पर अन्ना ने कहा कि अब भी सब कुछ पहले जैसा है, बस देखने के लिए चश्मा बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि पहले से ज्यादा लोग नवंबर व दिसंबर में दिल्ली के रामलीला मैदान पर होने वाले आंदोलन में दिखेंगे। अन्ना ने कहा कि उनकी जनतंत्र यात्रा का मकसद जनता के बीच लोक शिक्षा एवं जागृति प्रदान करना है।
आजादी के 66 साल बाद भी हम जनतंत्र महसूस नहीं कर पा रहे। सरकार जो योजनाएं चला रही है, उनकी लोगों को जानकारी नहीं है। ऐसे ही 1923 में अंग्रेजों ने जो कानून बनाए थे, उनके बारे में लोगों को बताया नहीं था।
संविधान में जिस तरह चुनाव की व्यवस्था की गई, उसका पालन नहीं हो रहा। इस बारे में वह चुनाव आयुक्त से भी मिलकर शिकायत करेंगे और अगर सुनवाई नहीं हुई तो सुप्रीमकोर्ट जाएंगे। क्या 2014 के चुनाव पर आंदोलन का असर पड़ेगा के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे यह नहीं सोचना है, कर्म करना ही मेरा कर्तव्य है।
अमेरिका को चिट्ठी लिखना गलत
अन्ना हजारे ने मोदी को वीजा न देने के लिए अमेरिका को चिट्ठी लिखे जाने को गलत बताया। उन्होंने कहा कि बेशक मोदी और भाजपा दोनों सांप्रदायिक हैं लेकिन देश के लोगों को यह लड़ाई देश में ही लड़ना चाहिए थी।
देश के बाहर इसे नहीं ले जाना चाहिए था। अन्ना ने कहा कि चीन की घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए लेकिन नीति में खामी नहीं होनी चाहिए।