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विश्लेषण: क्या बसपा देगी यूपी में सबसे ज्यादा ब्राह्मणों को टिकट! कितना कामयाब होगा मायावती का यह दांव?

Mon, 27 Dec 2021 05:46 PM IST
हिमांशु मिश्रा आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को आगे कर सभी पार्टियां राजनीतिक दांव खेल रही हैं। बसपा के अब तक घोषित तीन उम्मीदवारों में दो ब्राह्मण हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनाव में बसपा सबसे ज्यादा ब्राह्मण चेहरों पर दांव लगा सकती है।  
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बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में सभी पार्टियां ब्राह्मणों को लेकर न सिर्फ गोलबंदी कर रही हैं बल्कि उनको लेकर बड़ा राजनीतिक दांव भी लगाने वाली हैं। सवाल ये है कि कौन सी पार्टी ब्राह्मणों पर सबसे ज्यादा दांव लगाएगी। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने अब तक तीन उम्मीदवार घोषित किए हैं। इनमें दो ब्राह्मण हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बसपा गुपचुप तरीके से ही सही लेकिन ब्राह्मणों पर बड़ा दांव लगाने वाली है।
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बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने रविवार को अयोध्या मंडल में तीन विधानसभा उम्मीदवारों की घोषणा की। इसमें सुल्तानपुर लंभुआ से उदराज वर्मा, अमेठी से रागिनी तिवारी और सुल्तानपुर शहर से डीएस मिश्रा को उम्मीदवार घोषित किया गया।

2007 जैसी सोशल इंजीनियरिंग फिर से करने की कोशिश 
 सतीश चंद्र मिश्र लगातार दावा कर रहे हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में ब्राह्मण बसपा के साथ ही रहेगा। इसके पीछे उनका तर्क है कि भाजपा से ब्राह्मणों की लगाई गई उम्मीदें फेल हो चुकी हैं। सपा में ब्राह्मणों का कोई भी कद और पद नहीं होता है। पूर्वांचल में लगातार हो रहे कार्यक्रमों में सतीश मिश्र इस बात का जिक्र कर रहे हैं कि उनकी सरकार में ब्राह्मणों को किस तरह से आगे रखा जाता रहा है। 
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मिश्र का कहना है कि सरकारी वकीलों की नियुक्तियां हों या उनके मंत्रिमंडल में ब्राह्मणों का कद, बसपा हमेशा से ब्राह्मणों को आगे ले कर ही चलती रही है। सतीश मिश्र  2007 में सोशल इंजीनियरिंग कर सत्ता में आई बसपा के मुख्य सूत्रधार थे। सतीश मिश्र कहते हैं कि 'ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा' नारा इस बार फिर से पुनर्जीवित हो रहा है।
 
क्या बसपा का ब्राह्मण कार्ड रंग लाएगा?
बसपा से जुड़े सूत्र कहते हैं कि अगर सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से हुआ तो इस बार पार्टी ब्राह्मणों को भारी संख्या में टिकट देगी। जैसे-जैसे चुनाव तारीख नजदीक आएगी, प्रत्याशियों का नाम भी घोषित किया जाएगा। 
अयोध्या मंडल में घोषित तीन में से दो नाम ब्राह्मण जाति से होने पर बसपा के एक प्रमुख नेता का कहना है कि आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आने वाले दिनों में बसपा किस तरीके से ब्राह्मणों को आगे रखने वाली है। हालांकि उनका कहना है कि सारा फैसला पार्टी मुखिया मायावती और सतीश चंद्र मिश्र को ही लेना है। लेकिन यह तय है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में बसपा ब्राह्मणों पर दांव लगाने से नहीं हिचकेगी। इस बात का संकेत बसपा के ब्राह्मण सम्मेलनों से भी मिल चुका है।
 
'चुनाव में मायने रखता है ब्राह्मण कार्ड'
राजनीतिक विश्लेषक और दलित राजनीति पर कई पुस्तकें लिखने वाले दिल्ली विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रवक्ता दीनबंधु पचौरी कहते हैं कि बसपा की ओर से घोषित तीन नामों से पता चलता है कि वो आगे की बैटिंग कैसे करेगी। पचौरी कहते हैं बसपा स्ट्रैटेजिकली बैकफुट पर रहकर काम करती रहती है। ऐसा भी हो सकता है कि बसपा की जनसभाओं में उतनी भीड़ ना दिखे लेकिन इससे यह अंदाजा नहीं लगाना चाहिए कि बसपा किसी से पीछे है। 
 
पचौरी कहते हैं कि पिछले 15 साल में राजनीति की परिभाषा से लेकर वोट देने के मायने और वोटरों की सोच पूरी तरह से बदल चुकी है। ऐसे में यह कहना कि ब्राह्मणों को सबसे ज्यादा टिकट देकर कोई भी पार्टी सत्ता में वापसी कर सकती है, सही नहीं होगा। हालांकि, जब सभी पार्टियां जातिगत समीकरणों को साधते हुए ही आगे बढ़ती हैं तो ब्राह्मण कार्ड निश्चित तौर पर बहुत मायने रखता है।
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