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साहब! हम न ब्लाक जानीं आैर न ही ब्लाक प्रमुख को

Sat, 05 Nov 2016 12:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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दाड़नी का बागीचा - फोटो : अमर उजाला
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आधी आबादी को सशक्त बनाने की कोशिशें परवान चढ़ती नजर नहीं आ रही हैं। ग्राम पंचायतों में महिलाओं की सीट आरक्षित कर उन्हें सशक्त बनाने की योजना का भी यही हाल है। अपनी पंचायतों में शानदार विकास कार्य कराकर रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार के चयनित अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में महिला प्रधान डीएम के सवालों पर बगले झांकते नजर आईं।
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इन्हें पता ही नहीं उनकी पंचायत किस ब्लॉक में है। यह भी नहीं बता पाईं कि, गांव के विकास को कितनी धनराशि मिली, क्या-क्या कार्य कराए। उनकी पंचायत में कितनी समितियां हैं।
पंचायत सशक्तीकरण योजना के लिए जनपद की दस महिला प्रधानों का चयन रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार के लिए किया गया था। शुक्रवार को चयनित महिला प्रधानों को साक्षात्कार के लिए कलक्ट्रेट बुलाया गया। 
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डीएम वेद प्रकाश ने चयनित महिला प्रधानों से उनकी उपलब्धियों के बारे में पूछा तो वे कुछ बता नहीं पाईं। ज्यादातर प्रधानों को बेसिक जानकारी भी नहीं थीं। बोलीं कि, साहब उनके पति ही विकास कार्य कराते हैं। पुनरीक्षण अभियान के अंतर्गत गांव में कितने वोट बढ़े हैं। स्कूल में कितने शिक्षक पढ़ाते हैं। सामान्य सवालों के भी जवाब नहीं दे पाईं। यहां तक की एक प्रधान से जब डीएम ने पूूछा अमरोहा को जेपी नगर भी कहते है, जेपी नगर का पूरा नाम (फुल फार्म) क्या है, मगर महिला प्रधान ये भी नहीं बता पाईं। 

बीएसए से पूछा, दो घंटे पहले कैसे हो रही छुट्टी
अमरोहा। बेसिक शिक्षा विभाग को बच्चों की शिक्षा की परवाह नहीं है। जुमे के दिन समय से दो घंटे पूर्व ही छुट्टी कर दी जा रही है। रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार को लिए गए साक्षात्कार में इसका खुलासा हुआ है। इस पर डीएम ने बीएसए से पूछताछ की है।

इस संबंध में बीएसए पत्र जारी कर पूछा है किस शासनादेश के तहत स्कूलों में शुक्रवार को समय से दो घंटा पूर्व छुट्टी की जा रही है। यदि इस संबंध में कोई शासनादेश नहीं है तो तत्काल प्रभाव से इस प्रथा को बंद किया जाए। यदि कोई शासनादेश नहीं है तो तत्काल प्रभाव से इस प्रथा को बंद करना होगा। हर क्षेत्र में निर्धारित समय पर बेसिक स्कूल खुलेंगे और निर्धारित समय पर ही बंद करने होंगे। 


रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार को चयनित महिला ग्राम प्रधानों का साक्षात्कार लिया गया है। सात महिला प्रधानों को गांव के विकास, ग्राम पंचायतों के कार्यों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। गांव में कितनी समिति होती हैं उन्हें कुछ नहीं पता है। बेसिक जानकारी का अभाव है। इसी लिए उन्हें चयन सूची से बाहर कर दिया गया है। जबकि चार महिला प्रधानों ने संतोषजनक जवाब दिया हैं। पुरस्कार के लिए चार महिलाओं प्रधानों की संस्तुति करते हुए शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। -वेदप्रकाश, जिलाधिकारी
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