गजरौला। चूल्हे और चौके के साथ महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं परिवार की आय में बढ़ोतरी के लिए कारोबार में भी हाथ आजमा रही हैं। कुछ ने मधुमक्खी का पालन कर शहद निकालना शुरू कर दिया तो कई आटा चक्की चलाकर न सिर्फ घर की आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं। कई महिलाएं तो साल भर में दो से ढाई लाख रुपये कमा रही हैं।
स्वयं सहायता समूह की ब्लॉक मिशन प्रबंधक रंजना सैनी ने समूह से जुड़ी महिलाओं को सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर बैंक से ऋण दिलवाया। जिससे उनकाे अन्य-अन्य कार्य के लिए प्रेरित किया। ताकि वह घर की आय में इजाफा कर सकें। क्षेत्र के गांव सैमला में विनीता, मीना, पुष्पा, पूनम ने जय मां लक्ष्मी समूह बनाया। सबने मिलकर मधुमक्खी पालन शुरू किया। जिसके लिए खेतों में 70 पेटियां रखीं। जिनसे शहद का अच्छा उत्पादन हुआ। आस पास के बाजारों में बेचकर कमाई की। कई कंपनी के लोग खरीद कर ले जाने लगे।
इसी तरह डगरपुरी में कविता ने कई महिलाओं के साथ मिलकर श्री राधे स्वयं सहायता समूह बनाया। महिलाओं ने मधुमक्खी पालन के लिए 500 पेटियां रखीं। उनका कहना है कि साल भर में दो से ढाई लाख रुपये बचत हो रही है। साथ ही घर का काम भी प्रभावित नहीं हो रहा है। खर्च चलाने के लिए किसी घर के पुरुष सदस्य पर निर्भरता नहीं रही। उनकी अच्छी आजीविका चलती देख गांव की अन्य महिलाएं भी जुड़ने के लिए आगे आ रही हैं।
मनौटा की तीन महिलाएं चला रहीं आटा चक्की
गजरौला। हसनपुर मार्ग पर स्थित ब्लॉक क्षेत्र का गांव मनौटा निवासी महिलाओं कविता और रिंकू ने गांव की एक अन्य महिला के साथ मिलकर आटा चक्की बनाई। जिससे गांव के साथ ही आस पास के ग्रामीणों के गेहूं की पिसाई कर रही हैं। इससे अच्छी खास आय हो रही है। साथ ही घर के खाने के लिए भी आटा खरीदना नहीं पड़ता।