श्रीमद दयानंद कन्या गुरुकुल महाविद्यालय चोटीपुरा में व्याकरण कार्यशाला की शुरुआत हुई। भारत सरकार की अष्टादशी परियोजना के अंतर्गत शुरू हुई इस राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन 28 जुलाई तक होगा।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं पाणिनीय शोध संस्थान बिलासपुर की अध्यक्षा डॉ. पुष्पा दीक्षित ने कहा कि जो सीखें उसे अपने तक सीमित न रखें।
सोमवार को अलग-अलग संस्थाओं से पहुंचे अतिथियों के बीच व्याकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ। इसमें छात्राओं के संस्कृत व्याकरण को विषय बनाकर प्रस्तुत किया कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहा। डॉ. पुष्पा दीक्षित ने कहा कि जो हम सीखें, उसे केवल अपने तक सीमित न रखें। बल्कि अपने ज्ञान को इतना विस्तृत करें कि आपकी अनुपस्थिति में दूसरे लोग भी उसका लाभ ले सकें।
उन्होंने कहा कि आज के समय में सह शिक्षा व अंग्रेजी देश की दुर्दशा के मुख्य कारण हैं। लेकिन इसके विपरीत आचार्या सुमेधा ने देश की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कहा कि पौष्पी प्रक्रिया इस कार्यशाला का मुख्य पाठ्य विषय रहेगा। दिल्ली विवि के हिंदू अध्ययन केंद्र के प्रोफेसर ओमनाथ बिमली ने शास्त्रों का महत्व प्रतिपादित करते हुए कहा कि शास्त्र हमें विधि (करणीय) एवं निषेध (अकरणीय) का बोध कराते हैं।
यह हमारी वाणी तथा मन को अनुशासित करते हैं। इसलिए इनका नाम शास्त्र रखा गया है। प्रो. मदनमोहन झा ने कहा कि केंद्रीय संस्कृत विवि दिल्ली से संबद्ध होना सराहनीय है। कार्यशाला में कांशी हिंदू विश्वविद्यालय से प्रो. ब्रजभूषण ओझा, चौधरी चरण सिंह विवि से वाचस्पति मिश्रा, डॉ. अमृता कौर, डीआईओएस डॉ. प्रवेश कुमार, गुरुकुल हैदराबाद से आचार्य नरेंद्र, गुरुकुल ततारपुर से आचार्य कुशल देव शामिल रहे। आखिर में आचार्या सुमेधा ने सभी आगंतुकों का आभार जताया।