गजरौला के बगद नदी के पानी की गुणवत्ता दिखाता टीडीएस मीटर।
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बगद नदी और उसके आसपास का भूजल स्तर जहरीला हो गया है। औद्योगिक नगरी गजरौला में औद्योगिक इकाइयों से होने वाले जल प्रदूषण की जांच के लिए शनिवार को क्षेत्रीय युवाओं ने बगद नदी के पानी का टीडीएस चेक किया तो इसकी हकीकत सामने आई। युवाओं ने ट्यूबवेल और हैंडपंपों का भी टीडीएस जांचा। टीडीएस मीटर में आई रीडिंग से पानी पीने योग्य नहीं होने की बात सामने आई। टीम ने पानी के नमूने भी लिए। बाद में बगद नदी से सटे गांवों में पहुंच कर ग्रामीणों का दर्द सुना।
क्षेत्र के युवाओं की टीम शनिवार की सुबह करीब 11 बजे नेशनल हाईवे के पास से बह रही बगद नदी के किनारे पहुंची। यहां टोटल डिजोल्व सॉल्वेट मीटर(टीडीएस मीटर) से टीडीएस और पीएच वैल्यू चेक की। मीटर के मुताबिक बगद नदी के पानी का टीडीएस करीब 4800 व पीएच वैल्यू 11 पाया, जबकि नदी के आसपास के खेतों में लगे ट्यूबवेल के पानी का टीडीएस 2800 और हैंडपंपों के पानी का टीडीएस 1200 पाया गया।
प्रदूषण बोर्ड के पैरामीटर्स के मुताबिक पीने योग्य पानी का टीडीएस 120 से 350 होता है। पीएच 6.5 से 7.5, कार्बन ऑक्सीजन डिमांड 150, बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड 30 होती है। इससे साफ जाहिर है कि बगद नदी के दूषित पानी से ट्यूबवेल और हैंडपंपों का पानी भी दूषित हो रहा है।
यही वजह है कि बगद नदी से सटे ग्रामों में दूषित पेयजल से आंखों में जलन, खुजली, गैस, सफेद दाग, एलर्जी, कैंसर आदि बीमारियों से किसान ग्रस्त हैं। वहीं गांव युवाओं की टीम में गांव तिगरिया भूड़ और बैसाली आदि में पहुंच कर ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। बगद नदी के दूषित जल से खराब फसलों का जायजा लिया।