अमरोहा में विरोध जताते शिया समुदाय के लोग
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ईरान के नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद अमरोहा जिले में रहने वाले शिया समुदाय के लोगों में शोक और आक्रोश का माहौल देखने को मिला। जगह-जगह जलसे, मजलिसें और विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए गए। रविवार की सुबह अमेरिका और इस्रायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले में खामेनेई के निधन की खबर सामने आई।
प्रारंभिक स्तर पर आधिकारिक पुष्टि को लेकर असमंजस बना रहा। लगभग छह बजे मौत की पुष्टि की सूचना फैलते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। खासकर शिया बहुल मोहल्लों में मातमी माहौल रहा। नौगांवा सादात के इमामबाड़ों में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। कई स्थानों पर लोगों ने सीनाजनी कर मातम मनाया।
जुलूस की शक्ल में सड़क पर उतरे लोगों ने अमेरिका और इस्रायल के खिलाफ नारेबाजी की। यह सिलसिला सुबह से देर रात तक चलता रहा। अमरोहा शहर के मोहल्ला शफातपोता स्थित शिया जामा मस्जिद में भी बड़ी संख्या में लोग जुटे।
लोगों ने काले कपड़े पहनकर शोक व्यक्त किया और रमजान के महीने में हुए हमले की निंदा की। मजलिसों में उलेमाओं ने खामेनेई की मौत को शहादत बताते हुए कौम से एकजुट रहने की अपील की है।
अलविदा, अयातुल्ला आपने दुनिया को बता दिया कि अपने हक की लड़ाई सियासत नहीं, इबादत है। आप एक मिसाल हैं जिसने दिखाया कि जिल्लत के महलों से बेहतर स्वाभिमान की जिंदगी है। आप उस हौसले का नाम हैं जो हर तूफान के बाद फिर खड़ा हो जाता है। आपकी शहादत में भारत ने अपना सच्चा दोस्त खो दिया।
- कुंवर दानिश अली, पूर्व सांसद, अमरोहा