ईरान में हमले के बाद बिगड़ते हालातों के बीच नौगावां सादात कस्बे के सात से आठ परिवार वहां फंसे हुए हैं। इन परिवारों के सदस्य अलग-अलग शहरों में रह रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों को लेकर कस्बे में रहने वाले उनके परिजन और रिश्तेदार बेहद चिंतित हैं और सभी की सलामती की दुआ कर रहे हैं।
ईरान और इराक को पूरी दुनिया में शिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। यहां स्थित पवित्र धर्मस्थलों की जियारत करना हर शिया की दिली हसरत होती है। नौगावां सादात से भी हर वर्ष बड़ी संख्या में अकीदतमंद काफिलों के रूप में जियारत के लिए ईरान और इराक रवाना होते रहे हैं।
नौगावां सादात के कई युवा ईरान की यूनिवर्सिटीज में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि कुछ छात्र वहां दीनी कोर्स से जुड़े हुए हैं। कुछ दिन पहले हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए कई छात्र-छात्राओं को उनके परिजनों ने वापस भारत बुला लिया था।
हालांकि, सात से आठ परिवार ऐसे हैं जो नौकरी और जिम्मेदारियों के कारण अब तक भारत नहीं लौट सके और फिलहाल ईरान में ही हैं। इनमें नौगावां सादात निवासी मौलाना आमिर, मौलाना आतिफ, मौलाना नईम अब्बास, मौलाना रूह उल्ला, मौलाना आसिफ और मौलाना सैयद अहमद शम्स समेत अन्य लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
इनके परिजनों ने बताया कि ये सभी धर्मगुरु हैं और ईरान में दीनी तालीम से जुड़े संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनके परिवार भी वहीं साथ रह रहे हैं। अमेरिका-इस्राइल ने ईरान पर शनिवार को भी हमला किया है। ईरान पर एयर स्ट्राइक की गई हैं।
तनावपूर्ण स्थिति के बीच मोबाइल पर संपर्क नहीं होने नौगावां सादात में रहने वाले परिजनों की बेचैनी बढ़ा दी है। नौगावां सादात में परिवारों के घरों पर लगातार रिश्तेदारों और परिचितों का तांता लगा हुआ है।
सभी लोग हालात सामान्य होने और अपने परिजनों की सुरक्षित घर वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कस्बे की मस्जिदों और इमामबारगाहों में भी उनकी सलामती के लिए दुआओं की जा रही है।