अमरोहा। मायके आई विवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसकी मौत के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में दोनों आरोपियों जमानत नहीं मिली थी। तभी से वह जेल में बंद हैं।
हसनपुर के एक मोहल्ले में मजदूर का परिवार रहता है। उनकी बेटी की शादी 16 जनवरी 2015 को को संभल के एक गांव में हुई थी। शादी के दो महीने बाद विवाहिता मायके में आई हुई थी। इस दौरान वह शाम के समय शौच के लिए जंगल गई थी। तभी मोहल्ले के रहने वाले सचिन और दुर्गेश ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। मुंह खोलने पर परिवार को मारने की धमकी दी। डर की वजह से विवाहिता परिजनों को कुछ नहीं बता सकी। उसने आत्महत्या करने के उद्देश्य से खुद को आग लगा ली। परिजनों ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। जहां पीड़िता ने पुलिस को आपबीती सुनाई और बयान दर्ज कराए। विवाहिता ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। पिता की तहरीर पर पुलिस ने सचिन और दुर्गेश के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और आत्महत्या के लिए प्रेरित करने संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेज दिया था। तभी से दोनों आरोपी जेल में बंद थे। यह मुकदमा अपर एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) उमेश कुमार द्वितीय की अदालत में विचाराधीन था। मंगलवार को इस मुकदमे की सुनवाई हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौधरी ने अभियोजन पक्ष की तरफ से जोरदार पैरवी की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर दोनों आरोपी सचिन और दुर्गेश को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
पांच साल बाद मिला बेटी को न्याय
अमरोहा। पांच साल पहले विवाहिता के साथ दुष्कर्म हुआ था। उसने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। पांच साल से दोनों दरिंदे जेल में बंद है। इस जघन्य अपराध में न्यायालय ने आरोपियों को जमानत तक नहीं दी। इस मुकदमे की सुनवाई भी फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई। इसके बाद भी इस बेटी को पांच साल बाद न्याय मिल सका।