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डॉक्टर बेटी के साथ हैवानियत पर वकीलों में उबाल

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अमरोहा। जनपद न्यायालय परिसर में अधिवक्ता दिवस पर वकीलों ने हैदराबाद में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म के बाद जलाकर हत्या पर रोष प्रकट किया। कहा कि हमारे देश का कानून दोषियों को फांसी देने के लिए सक्षम है। अधिवक्ताओं ने सरकार से आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने के मांग की।
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उत्तर प्रदेश अधिवक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु शर्मा ने कहा कि तीन दिसंबर 1884 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म हुआ था। वह एक प्रखर नेता होने के साथ प्रख्यात अधिवक्ता भी थे। उनके जन्म दिवस को देशभर में अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है। अधिवक्ता समाज उन्हें अपना आदर्श मानता है और उनके पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लेता है। हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद उसे जलाकर मार दिया गया। यह घटना पूरे देश को झकझोर देने वाली है। इस हैवानियत की अधिवक्ताओं ने कड़े शब्दों में निंदा की। ऐसे अपराधों की पुर्नावृत्ति नहीं हो इसके लिए भारत और प्रदेश सरकार दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। अधिवक्ता मुदित माथुर ने कहा कि जो एक महिला डॉक्टर का बलात्कार के बाद हत्या करने की घटना देश में इस समय प्रसारित हो रही है। उस पर सरकार को शीघ्र कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है। वर्तमान कानून में भी इस तरह के प्रावधान है कि दोषियों को फांसी की सजा दिलाने में मौजूदा कानून भी सक्षम है। इस दौरान सूर्य प्रताप सिंह, दिनेश सिंह, खुसरो नदीम, सचिन गुप्ता, वीर सिंह सैनी, इरफान अली मंसूरी, परम सिंह सैनी, विनोद सैनी, अखिलेश शर्मा, गौतम सैनी, प्रमोद पाल आदि मौजूद रहे।
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