वन विभाग के एक बड़े अफसर ने मकान का प्लॉट बनाने के लिए हरे-भरे पेड़ काट डाले।
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वन विभाग की जमीन पर माफिया को कब्जा कराने के आरोप में हसनपुर तहसील के डिप्टी रेंजर नप गए हैं, लेकिन इसके बाद भी विभागीय अफसर और कर्मचारी बाज नहीं आ रहे हैं। नेताओं के हाथ में खेल रहे विभागीय अफसर कानून को ताक पर रख पेड़ पौधे कटवा रहे हैं। नौगावां सादात में चार हरे भरे पेड़ों को कटवा डाला। पेड़ कटवाने का आरोप बीट प्रभारी पर है। जानकारी होने पर डीएफओ ने भी चुप्पी साध ली।
जिले में वन भूमि और वन संपदा पर माफिया की नजर है। हसनपुर तहसील के जेबड़ा, बिहारीपुर-पथरा वन विभाग की जमीन पर कब्जे के लिए महीनों से चर्चा में हैं। माफियाओं से हमसाज होने के आरोप में वन संरक्षक/ क्षेत्रीय निदेशक आरपी वर्मा ने डिप्टी रेंजर हरीश मेहता को सस्पेंड कर दिया।
मगर इसके बावजूद वन विभाग के अफसर और कर्मचारी बाज नहीं आ रहे हैं। अब नौगावां सादात में बीट प्रभारी पर चार हरे भरे पेड़ कटवाने का आरोप है। कस्बे में अबू तालिब चौक बन रहा है। जिसके रास्ते में पेड़ बाधक थे। पांचों हरे भरे पेड़ों को काट डाला गया। यह मामला प्रभागीय वन अधिकारी के संज्ञान में भी था, लेकिन उन्होंने भी पेड़ों को बचाने की कोशिश नहीं की।
बताते हैं राजनीतिक दबाव के चलते वह हरे भरे पेड़ों को कटने से बचाने में हाथ खींचे रहे। डीएफओ ने बीट प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। आरोप यह भी लग रहे हैं कि बीट प्रभारी ने डीएफओ की शह पर हरे भरे पेड़ों को कटवाया था। सबूत मिटाने को जड़ों का जेसीबी से खुदवाने के बाद गड्ढे पाट दिए गए। मामले में डीएफओ मो. उमर खां का कहना है कि मामले की जानकारी मिली थी, बीट प्रभारी को मौके पर भेजा था, लेकिन तब तक पेड़ कट चुके थे। मामले की जांच की जा रही है।