संवाद न्यूज एजेंसी
अमरोहा। शहर में रोजाना लगने वाला जाम अब लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। जाम की समस्या से न सिर्फ आमजन बल्कि व्यापारी भी परेशान हैं। सड़कों पर घंटों जाम लगने से कारोबार पर भी असर पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
शुक्रवार को भी शहर के कई प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। व्यापारियों ने बताया कि यदि ई-रिक्शाओं के संचालन के लिए शहर में रूट प्लान लागू कराया जाए और अवैध ई-रिक्शा पर की कार्रवाई होनी चाहिए। सड़क पर खडे़ बिजली के खंभे पीछे हटाया जाए, जिससे सड़कों पर वाहनों को संचालन आसानी से हो सके।
व्यापारी संगठन हर महीने होने वाली पुलिस-प्रशासन की बैठकों में इस मुद्दे को उठाते रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
शहर के मुख्य बाजारों और चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं, जिससे पैदल चलने वालों को भी परेशानी होती है। जाम की समस्या का मुख्य कारण ई-रिक्शाओं की बढ़ती संख्या को माना जा रहा है। एआरटीओ कार्यालय में पंजीकृत ई-रिक्शाओं की संख्या करीब पांच हजार है, जबकि शहर की सड़कों पर 20 हजार से अधिक दौड़ रहे हैं।
बिना पंजीकरण के बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चलने से यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। जाम से निजात दिलाने के लिए पुलिस प्रशासन ने कई बार योजनाएं बनाई। कुछ समय पहले जनपद पुलिस ने ई-रिक्शाओं के संचालन को व्यवस्थित करने के लिए 13 रूट निर्धारित किए थे। इसके साथ ही पंजीकृत ई-रिक्शाओं पर यूनिकोड नंबर अंकित कर उन्हें अलग-अलग रूट भी आवंटित किए गए थे। उस दौरान यातायात पुलिस ने परिवहन विभाग के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाते हुए कई ई-रिक्शाओं पर कार्रवाई भी की थी। हालांकि, यह योजना ज्यादा समय तक धरातल पर प्रभावी नहीं रह सकी।
रूट डायवर्जन प्लान भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया, जिसके चलते स्थिति फिर पहले जैसी हो गई। व्यापारियों का कहना है कि जाम के कारण ग्राहक उनकी दुकानों तक नहीं पहुंच पाते, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है। पुलिस प्रशासन और नगर पालिका को मिलकर ठोस योजना बनानी चाहिए, ताकि शहर को जाम की समस्या से राहत मिल सके।