अमरोहा। दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया एनएचएआई की ओर पर हर साल बढ़ोतरी की जा रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर विस्तार नहीं किया जा रहा है। अब जब कांवड़ियों के जत्थे यहां से गुजर रहे हैं तो जगह-जगह जलभराव और गड्ढे नजर आ रहे हैं। कहीं-कहीं पर लाइटें भी नहीं जलती हैं। ऐसे में दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, लेकिन इस तरफ न तो प्रशासन का ध्यान है और न ही राजमार्ग प्राधिकरण का। बुधवार को ब्रजघाट से लेकर चौधरपुर तक करीब 60 किलोमीटर की दूरी में कई जगह अव्यवस्थाएं मिलीं।
हाईवे खूनी होता जा रहा है। आए दिन किसी न किसी की हादसे में जान जा रही है। जहां वाहनों की तेज रफ्तार हादसे का कारण बन रही है, वहीं हाईवे के बने गड्ढे भी बहुत हद तक हादसे के लिए जिम्मेदार हैं। क्षेत्र में हाईवे पर कई जगह गड्ढे बने हैं। चौपला से लेकर नाईपुरा तक हाईवे व हाईवे की सर्विस रोड पर गड्ढों की भरमार है। जबकि नाईपुरा में दो कॉन्वेंट स्कूल, दो परिषदीय विद्यालय और एक इंटर कॉलेज भी है। जिनमें हजारों छात्र-छात्रा पढ़ाई कर रहे हैं। हाईवे व उसकी सर्विस रोड पर गड्ढे बने होने के कारण आए दिन हादसे का शिकार होते हैं।
नेशनल हाईवे किनारे डिडौली में कोतवाली है। जबकि, दूसरी तरफ सर्विस रोड है। यहां आलम यह है कि जरा सी बारिश में जलभराव हो जाता है। वर्तमान में कोतवाली के सामने हाईवे पर कीचड़ फैला है। वहीं, नीलीखेड़ी व चौधरपुर में भी हाईवे पर कई बार भारी जलभराव की स्थिति बन जाती है। जिससे वहां गड्ढा बन गए हैं। ऐसे में अब जब कांवड़िये यहां से गुजर रहे हैं तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात में एनएचएआई की पोल खुल रही है। हाईवे से जुड़ी सर्विस रोड का बुरा हाल है। मुरादाबाद से जोया को जाने वाली सर्विस रोड पर गांव हरियाना संभल चौराहे तक जलभराव है। वहीं, दिल्ली से मुरादाबाद की लेन की ओर आंनद विहार कालोनी की सर्विस रोड का बुरा हाल है। बीच-बीच में दस किलोमीटर से अधिक सर्विस रोड पूरी तरह खराब हो चुकी है। जिस पर अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।
ब्रजघाट से लेकर मुरादाबाद के बीच रजबपुर में टोल प्लाजा है। हाईवे से 24 घंटे के दौरान 10 से 12 हजार वाहन गुजरते हैं। यहां यात्रियों का भार अनुमानित एक लाख है। वाहनों से लाखों की टोल वसूली होती है। लेकिन, सुविधा नहीं मिल पा रही है।रजबपुर स्थित टोल प्लाजा पर यात्री की सुरक्षा के मद्देनजर एक एंबुलेंस व एक क्रेन मौजूद है। लेकिन, पेट्रोलिंग करने वाली टीम नहीं है। जिससे कई बार हादसा होने के बाद घटना का पता नहीं लग पाता है। पुलिस टीम को काफी देर बात पता लगता है।