अमरोहा। कुतुबपुर हमीदपुर में तेंदुए की पीट-पीट का हत्या करने के आरोप में जेल भेज गए ग्राम प्रधान के भाई समेत तीनों ग्रामीणों को जमानत मिल गई है। एसीजेएम द्वितीय कोर्ट से जमानत प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद ग्रामीण जिला जज की अदालत में गए। केस की गंभीरता को देखते हुए जेल भेजे गए तीनों ग्रामीणों को जिला जज ने जमानत दे दी है। जेल से छूटने के बाद शुक्रवार को तीनों ग्रामीण अपने परिवार के बीच पहुंच गए।
तेंदुए के किसानों पर हमले और उससे मरने तक पीटे जाने की घटना बीते शनिवार सुबह हुई थी। तेंदुए को मारे जाने के मामले में वन विभाग डिप्टी रेंजर राजीव वर्मा ने शनिवार को तहरीर दी थी। जिसमें ग्राम प्रधान बृजेश व उनके साथियों का नाम शामिल थे। इसके बाद थाने से छुड़ाए गए तीनों आरोपियों के रविवार को सरेंडर के बाद तहरीर से ग्राम प्रधान बृजेश व उनके साथियों के नाम हटा दिए गए थे। तेंदुए की पीटकर हत्या और उसके बाद हिरासत में लिए गए तीन लोगों को थाने से छुड़ा ले जाने के बाद पुलिस और वन विभाग ने ग्रामीणों पर सख्ती बढ़ाई।
ग्रामीणों को समझाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों की गिरफ्तारियां होंगी। ग्राम प्रधान पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद दबाव में आए ग्रामीणों ने राजू सैनी, धर्मवीर व ग्राम प्रधान के भाई राजेश कुमार को थाने ले जाकर सरेंडर करा दिया था। बाद में पुलिस ने ग्राम प्रधान बृजेश के भाई राजेश कुमार और धर्मवीर व राजू सैनी गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। जहां से तीनों को जेल भेज दिया था।
इस मामले में तीनों ग्रामीणों ने अपने अधिवक्ता कपिल चिकारा के माध्यम से एसीजेएम द्वितीय के यहां जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया। जिसके इस कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद जिला जज की अदालत में जमानत के लिए अपील की थी। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद तीन ग्रामीणों को जमानत दे दी। शुक्रवार को तीनों आरोपी जेल से अपने घर पहुंच गए। अधिवक्ता कपिल चिकारा ने बताया कि वन विभाग में जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था, उनमें सात साल से कम सजा का प्रावधान है, लेकिन वन्य जीव की हत्या से जुड़ा मामला था और यह गंभीर अपराध माना जाता है। इसलिए केस की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों को जेल भेजा गया था। जिन्हें चार दिन बाद जमानत मिल गई है।
इस तथ्य पर मिली जमानत
एफआईआर के मुताबिक तेंदुए को गांव के नजदीक के गन्ने के खेत में लोगों ने घेर रखा था। तेंदुए ने कुछ ग्रामवासियों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। बचाव पक्ष की ओर से यह तथ्य प्रस्तुत किए गए कि वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा की धारा 11 की उपधारा (2) की व्यवस्था कि अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की प्रतिरक्षा में किसी वन्य प्राणी को सद्भावनापूर्वक मारना या घायल करना अपराध नहीं होगा।