करीब 11 साल पहले किसान की हत्या करने वाले तीन दोषियों को न्यायालय ने बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही तीनों पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। सभी दोषी जमानत पर जेल से बाहर थे। कोर्ट का फैसला आने के बाद सभी को जेल भेज दिया गया।
गजरौला थानाक्षेत्र के शीशोवाली में टीकाराम सिंह का परिवार रहता है। उनके बेटे शिवराज की शादी कांकाठेर में रहने वाली सरोज के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही शिवराज अपनी पत्नी के साथ ससुराल में रहता था। उसके साथ-ससुर नहीं थे, इसलिए अपनी सालियों की शादी भी शिवराज सिंह ने की थी। 15 मार्च 2014 की सुबह 11 शिवराज सिंह के रिश्ते का बहनोई गंगाचोली निवासी पिंटू अपने साथ गांव के ही रहने वाले जयपाल और बाइखेड़ा के रहने वाले थान सिंह को लेकर कांकाठेर आया। होली के मौके पर खाने-पीने की बात कहकर शिवराज को साथ ले गया।
रात में शिवराज घर नहीं लौटा तो उनके परिजन गंगाचोली में पिंटू के पास पहुंचे लेकिन पिंटू ने कोई सही जवाब नहीं दिया। इसके बाद परिजन तलाश करते हुए ब्रजघाट पहुंचे तो यहां रेलवे स्टेशन के पास तालाब में शिवराज का शव मिला। मौके पर पहुंची गढ़मुक्तेश्वर पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद शिवराज के शव का पोस्टमार्टम कराया। इस मामले में टीकाराम सिंह ने गजरौला थाने में पिंटू, जयपाल और थान सिंह के खिलाफ हत्या कर साक्ष्य छिपाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। तीनों जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मुकदमे की सुनवाई जिला जज जफीर अहमद की अदालत में चल रही थी। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता महावीर सिंह पैरवी कर रहे थे। बुधवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की। साक्ष्यों और सुबूतों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी पिंटू, जयपाल और थान सिंह को दोषी करार दिया और तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर 75-75 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
कहासुनी से नाराज होकर ले ली जान
जिला शासकीय अधिवक्ता महावीर सिंह ने बताया कि दोषी पिंटू मृतक शिवराज का रिश्ते का बहनोई है। बहन के साथ मारपीट करने को लेकर शिवराज की पिंटू से कहासुनी हो गई थी। इसी बात से पिंटू रंजिश रखने लगा था। बदला लेने के लिए पिंटू ने अपने साथी जयपाल और थान सिंह के साथ मिलकर शिवराज की हत्या की थी। बाद में शव को ब्रजघाट रेलवे स्टेशन के पास तालाब में फेंक दिया था।