मंगलवार को अमर उजाला की टीम ने जिलेभर में पड़ताल की, जिसमें अधिकांश समितियों पर खाद की कमी मिली। अमरोहा, हसनपुर, मंडी धनौरा और गजरौला क्षेत्र की समितियां पर खाद ही नहीं था। कई जगह ताले लटके नजर आए। वहीं, दढि़याल समिति पर मारामारी मची रही, लेकिन वितरण के दौरान खाद खत्म होने से किसान मायूस होकर लौटे।
खाद लेने को एक सप्ताह से काट रहे है चक्कर
अमरोहा।
बंबू गढ़ चौराहे पर स्थित पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र के गोदाम मंगलवार सुबह से ही ताला लटका नजर आया। यहां किसान खाद लेने पहुंचे, लेकिन ताला लगा होने से उन्हें वापस लौटना पड़ा। किसान बबलू कुमार, राम सिंह, महेश कुमार, छत्रपाल आदि ने बताया कि लगातार एक सप्ताह से चक्कर काट रहे हैं, कभी खाद नहीं मिल पाता है तो कभी ताला लटका रहता है। जबकि, दाउदसराय बहुद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति पर काफी समय से एनपीके उपलब्ध नहीं हैं। उधर, डिडौली की पूरनपुर सहकारी समिति में एक सप्ताह से खाद उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन खाली हाथ लौट रहे हैं।
कुछ देर में ही खत्म हो गया स्टाक
आदमपुर। सहकारी समिति दढि़याल पर मंगलवार को गोदाम में केवल खाद के 180 बोरे मौजूद थे। लेकिन, सुबह से ही किसानों की भीड़ सहकारी समिति पर पहुंचना शुरू हो गई। जो दोपहर तक और बढ़ गई। खाद वितरण के दौरान बीच में ही खाद का भंडारण खत्म हो गया। जिससे अधिकांश किसानों को खाद नहीं मिल सका। सहकारी समिति प्रभारी राकेश सिंह राघव कहना है कि जल्द ही खाद उपलब्ध कराकर शेष किसानों को भी दिया जाएगा। उधर, गारबपुर सहकारी समिति पर पर करीब सात दिनों से खाद नहीं है। जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उधर, सहकारी समिति ढबारसी पर खाद का भंडारण सोमवार को खत्म हो गया था। यहां पर मंगलवार को खाद का वितरण नहीं हो सका।
खाली हाथ लौटे किसान
हसनपुर। सहकारी समिति शाहपुर कलां पर सोमवार को खाद का वितरण किया गया था। समिति को 250 कट्टे खाद उपलब्ध हुआ था, जो शाम तक समाप्त हो गया। वहीं, मंगलवार को खाद लेने पहुंचे किसानों को परेशानी हुई। वहीं सहकारी समिति भदौरा पर भी पिछले दो दिनों से खाद का वितरण नहीं हुआ है। उम्मीद है कि बुधवार को वहां खाद का वितरण किया जाएगा।
खत्म होने के कगार पर एनपीके, डीएपी है ही नहीं
गजरौला।
किसान गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। लेकिन खाद की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। बैरमपुर भूड़ किसान सहकारी समिति पर एनपीके भी खत्म हो गया है। बाकी गजरौला, अल्लीपुर भूड़ सहकारी समितियों पर डीएपी आया ही नहीं है। एनपीके भी थोड़ा ही बचा है। ढकिया भूड़, कर्मल्लीपुर व तिगरी सहकारी समितियाें पर खाद की मारा मारी है। डीएपी के लिए किसान भटक रहे हैं। मंगलवार को गजरौला सहकारी समिति पर डीएपी नहीं मिलने पर कई किसानों ने एनपीके ही लिया।
गेहूं की बुवाई के लिए किसानों को नहीं मिल रहा है खाद
मंडी धनौरा।
गेहूं की बुवाई के लिए किसानों को एनपीके खाद नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र की पांच सहकारी समितियों पर मात्र 1400 बोरा एनपीके खाद का आया था। खाद आने की सूचना मिलते ही किसान सहकारी समिति पर उमड़ पड़े। लेकिन, एक ही दिन में खाद के सारे बोरे बिक गए। वासीपुर किसान सहकारी समिति के प्रबंध निदेशक चेतेंद्र पाल सिंह ने बताया कि उनके पास 13 नवंबर को 250 बोरा एनपीके खाद आया था। क्षेत्र की पांच सहकारी समितियां पर सोमवार को 1400 बोरा खाद आया था। जबकि, पांचों समितियां के करीब 8000 किसान सदस्य हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग के सापेक्ष में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने की मांग की है।
भेजी गई 2600 मीट्रिक टन की डिमांड
जिला कृषि अधिकारी बबलू कुमार का कहना है कि गोदाम में काफी स्टाॅक पहुंच चुका है। मंगलवार को गोदाम 935 मीट्रिक टन डीएपी और 2233 मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध रहा। धीरे-धीरे जिले 42 समितियों पर खाद भिजवाया जा रहा है। आने वाले दिनों में खाद की कमी न रहे, इसके लिए 2600 मीट्रिक टन खाद डिमांड और भेजी गई है। समिति से जुड़े किसान सदस्यों के अलावा आम किसान को भी खाद उपलब्ध कराया जा रहा है।