फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Amroha News: शहरों में भी झोलाछापों की भरमार, बेखबर जिम्मेदार

Tue, 24 Jun 2025 01:27 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
विज्ञापन
विज्ञापन
अमरोहा। स्वास्थ्य विभाग और झोलाछाप की सांठगांठ मरीजों पर भारी पड़ रहा है। आए दिन झोलाछापों के उपचार से लोगों की जान जा रही है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करता आ रहा है।
विज्ञापन


स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की अनदेखी और महरबानी से शहर से लेकर गांवों तक झोलाछापों का मकड़जाल फैला है। झोलाछाप ऑपरेशन से प्रसव कराने के साथ ही गंभीर बीमारियों का बेखौफ होकर इलाज कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में झोलाछापों के उपचार की वजह से 10 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से झोलाछाप बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड में सिर्फ 114 अस्पताल पंजीकृत है। जबकि जिलेभर में हजारों फर्जी अस्पताल संचालित हैं। शहर से लेकर गांव तक गली-मोहल्लों में झोलाछाप इलाज कर रहे हैं। कुछ का पंजीकरण क्लीनिक के नाम पर है तो कुछ बगैर पंजीकरण के ही चल रहे हैं। इतना ही नहीं बिना पंजीकरण अस्पतालों में ओपीडी के साथ प्रसव भी कराए जाते हैं। इन अस्पताल के बोर्डों पर एमबीबीएस डॉक्टरों के नाम तो अंकित हैं, लेकिन मरीजों का इलाज झोलाछाप ही करते हैं।
विज्ञापन


अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर अंकुश लगाने के लिए विभाग की ओर से केवल खानापूर्ति की जाती है, जबकि एमबीबीएस डॉक्टर ही अस्पताल का पंजीकरण करा सकता है। ऐसे में कुछ लोग एमबीबीएस डॉक्टर की डिग्री लगाकर पंजीकरण करा लेते, जिसके बदले में संबंधित डॉक्टर द्वारा अस्पताल संचालक से महीने व साल में धनराशि वसूली की जाती है, जबकि प्रसव आदि कराने के लिए एमबीबीएस महिला डॉक्टर का होना अनिवार्य है। हालांकि प्रशिक्षित स्टाफ नर्स से भी काम चल सकता है।



पंजीकरण क्लीनिक का, कराते हैं प्रसव

बहुत से अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने अपना पंजीकरण क्लीनिक का करवा रखा है। वहां पर ओपीडी के साथ प्रसव भी होता है। इनमें गांव की दाईयां प्रसव कराती हैं। कई बार असुरक्षित प्रसव होने के कारण जच्चा बच्चा की मौत के भी कई मामले हो चुके हैं।





आशाओं की भी रहती है संलिप्तता

आशाओं को भले ही गर्भवती महिलाओं की देखरेख करने के लिए रखा गया हो, लेकिन मोटे कमीशन के लालच में आशाएं गांव की भोली भाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज का झांसा देकर फर्जी अस्पतालों में ले जाती है, जिसमें उन्हें मोटा कमीशन मिलता है।



यह है अस्पताल का मानक

रजिस्ट्रेशन एमबीबीएस डिग्री धारक डॉक्टर के नाम पर होता है। प्रसव के लिए एमबीबीएस महिला डॉक्टर या फिर प्रशिक्षित स्टाफ नर्स, फायर ब्रिगेड और प्रदूषण बोर्ड से एनओसी, बिल्डिंग का नक्शा, किराया नामा या मालिकाना हक, कचरा प्रबंध के लिए अलग अलग रंग की बाल्टी आदि होनी चाहिए। मेडिकल स्टोर होने की स्थित में उसका भी पंजीकरण होना चाहिए।



10 जून को गांव बीजनपुर निवासी किसान प्रेमपाल सिहं के 16 वर्षीय बेटे राजकुमार को बुखार की शिकायत हुई थी। इसके बाद परिजन गांव में ही झोलाछाप के पास लेकर पहुचे। जहां झोलाछाप के द्वारा इलाज शुरू किया गया। इलाज शुरू करते ही किशोर की हालत बिगड़ती चली गई। परिजन उसे इलाज के लिए मेरठ लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजन शव लेकर पहुंचे तो झोलाछाप क्लीनिक पर ताला लगाकर गायब हो गया। इसके बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। स्वास्थ्य विभाग शिकायत नहीं मिलने की बात कहकर कार्रवाई करने से बचता रहा।



17 जून को गांव बांसका कलां निवासी सुहेल ने प्रसव पीड़ा होने पर अपनी पत्नी रिहाना को गंगवार स्थित झोलाछाप के जच्चा बच्चा केंद्र पर भर्ती कराया था। प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने झोलाछाप के जच्चा बच्चा केंद्र पर जमकर हंगामा किया था। बावजूद इसके कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।



21 जून को रहरा थानाक्षेत्र के गांव मछरिया निवासी किसान ने अपनी पत्नी को सुतावली में झोलाछाप के क्लीनिक पर भर्ती करा दिया था। झोलाछाप के इंजेक्शन लगाते ही महिला की हालत बिगड़ती चली गई और कुछ ही देर में महिला की मौत हो गई। परिवार के लोगों ने झोलाछाप के क्लीनिक पर हंगामा किया था। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई नहीं की।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें