यूक्रेन में फंसा गजरौला के सुल्तानपुर का युवक अपने वतन वापसी के लिए ट्रेन में सवार होकर बार्डर की तरफ रवाना हो गया। फोन पर परिजनों से उसने खुद को सुरक्षित बताते हुए ट्रेन से फ्लाइट की तरफ जाने की बात कही।
गजरौला के सुल्तानपुर गांव का 28 वर्षीय युवक कैलाश यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। हालत बिगड़ने के बाद से वह वहीं पर फंसा है। परिजनों के मुताबिक उसने कई दिन मेट्रो के बेसमेंट में छिपकर जान बचाई। मंगलवार तक इस कदर बिगड़े कि वह भोजन करने ही कमरे पर जाता था। मगर बुधवार की खबर परिजनों के लिए राहत भरी रही। कैलाश के भाई सुरेंद्र के मुताबिक उसने मैसेज भेजा। जिसमें बताया कि वह सुरक्षित है। ट्रेन में सवार होकर फ्लाइट पकड़ने को बार्डर की तरफ जा रहा है। सुरेंद्र का कहना है कि इसके बाद उससे कोई संपर्क नहीं हो सका। उधर यूक्रेन में ही हालत बिगड़ने के बाद रविवार को अपने घर लौटे कटाई निवासी 19 वर्षीय सुहेल खां का साहस बरकरार है। सुहेल खां का कहना है कि माहौल सामान्य होने के बाद वह दोबारा यूक्रेन को जाएगा। उसके पिता शब्बू खां भी कहते हैं कि कोई डर नहीं लग रहा है। हालात सुधर जाने पर बेटे को भेजने से कोई गुरेज नहीं।
यूक्रेन में फंसे औद्योगिक नगरी के रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ दरोगा के बेटे की भारतीय दूतावास ने लोकेशन मंगाई है। उसका बंकर वार जोन में जानकारी मिलने पर बाहर न निकलने की हिदायत दी। परिजनों से बात कर बेटे ने बताया कि वह सुरक्षित है।
मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र के गांव छुर निवासी चंद्रशेखर सिंह का 26 वर्षीय बेटा हर्ष तालियान बीते एक साल से यूक्रेन में रहकर कम्प्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रहा है। मगर रूस के हमले के बाद हालात बिगड़ने पर हजारों युवकों के साथ वह भी फंस गया। जिससे चिंतित परिजनों के होश उड़े हैं। पिता चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि उनकी बुधवार को भी बेटे से बात हुई। रिश्तेदार के जरिए यूक्रेन में भारतीय दूतावास से संपर्क हुआ। दूतावास ने बेटे के ठिकाने की लोकेशन मांगी। जिस पर पता चला कि जहां वह बंकर में छिपा है, वह इलाका वार जोन के रूप में चिन्हित है। उसके चारों तरफ बमबारी हो रही है। दूतावास ने बंकर में छिप कर रहने की हिदायत दी है। उधर बेटा भी खुद को सुरक्षित बता रहा है। उसका कहना है कि बंकर में ही उसे यूनिवर्सिटी की तरफ से खाना मुहैया कराया जा रहा है। बाहर निकलने पर पाबंदी है।