शासन ग्रामीण अंचलों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति देने का दावा कर रहा है, जबकि जयतौली विद्युत उपकेंद्र से 18 घंटे बिजली मिलना तो दूर रोजाना भी आपूर्ति नहीं मिल रही है। नलकूप चलाने के लिए 24 घंटे बाद आपूर्ति दी जा रही है। पर्याप्त बिजली आपूर्ति नहीं मिलने के कारण सिंचाई के अभाव में फसलें सूख रही हैं। किसानों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जयतौली बिजली उपकेंद्र से 27 गांव जुड़े हैं। बिजली आपूर्ति के लिए जयतौली, महरपुर और रुखालू समेत तीन फीडर हैं। तीनों फीडर से घरेलू बिजली आपूर्ति के साथ ही करीब दो सौ नलकूपों को बिजली दी जा रही है। ओवरलोड से जूझ रहे उपकेंद्र में पांच-पांच एमवीए के दो ट्रांसफार्मर हैं। शासन का जोर है कि नलकूप चलाने के लिए ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे बिजली दी जानी चाहिए। जिससे किसान अपनी फसलों की सिंचाई कर सकें, लेकिन जयतौली बिजली उपकेंद्र से जुड़े तीनों फीडरों के नलकूपों को 18 घंटे बिजली नहीं दी जा रही है। बिजली कर्मचारी ओवरलोड का हवाला देकर 24 घंटे बाद चार से पांच घंटे ही आपूर्ति दे रहे हैं। जिसके कारण फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
नतीजतन उपकेंद्र से जुड़े किसानों की फसलें सूखने लगी हैं। महरपुर फीडर से जुड़े चकफेरी वाला महरपुर निवासी महेश खड़गवंशी, संजय खड़गवंशी, चंद्रकेश, परम सिंह, हरिराज सिंह, खजान सिंह, धर्मवीर खड़गवंशी, जयपाल, वंशी वाला महरपुर निवासी त्रिलोकी खड़गवंशी, धर्मवीर, लाखन सिंह, लाल सहाय, कैलाश खड़गवंशी, महरपुर गुर्जर निवासी जयवीर सिंह, रमेश सिंह, हरवीर सिंह, छत्रपाल सिंह, महेंद्र सिंह आदि किसान कहते हैं कि दस घंटे भी नहीं मिल रही है।
24 घंटे तक टू फेस रहती है। जिसमें मुश्किल से आठ घंटे आपूर्ति मिलती है। उसमें भी बार-बार कटौती की जाती है। सिंचाई नहीं होने के कारण फसलें सूख रही हैं। शुक्रवार की शाम सात बजे से टू फेस चल रही है। किसानों का आरोप है कि बिजली कर्मचारी दूसरे फीडरों को बिजली दे रहे हैं।
शेड्यूल के अनुसार बिजली आपूर्ति देने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि ओवरलोडिंग की समस्या तो बनी हुई है। यदि कहीं फाल्ट की दिक्कत है तो वहीं आपूर्ति प्रभावित होती है। -अनिल कुमार, एक्सईएन विद्युत हसनपुर।