अमरोहा। जिले के जन औषधि केंद्रों पर शुगर, बीपी, हार्ट, कोलेस्ट्रॉल और पेनकिलर समेत 50 से ज्यादा तरह की दवाइयां का भी टोटा है। सस्ती दवाइयां नहीं मिलने के कारण मरीज परेशान हैं, उन्हें मेडिकल से महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। दम तोड़ती व्यवस्था के कारण सात साल में जिले में 12 औषधि केंद्र बंद हो चुके हैं। जो खुले हैं, उनमें दवाओं के लाले पड़े हैं।
सस्ती दवाइयां मुहैया कराने के लिए साल 2018 में 26 जन औषधि केंद्र खोले गए थे। इनमें से अब तक 12 पर ताला लटक गया है। वर्तमान में 14 जन औषधि केंद्र संचालित हैं। इन पर भी खांसी, बुखार, जुकाम व शुगर की दवाएं तो आसानी से मिल जाएंगी, लेकिन आंखों व दांतों की दवा के अलावा हार्ट, कैंसर व गंभीर बीमारियों की दवा नहीं मिल पा रही है। जबकि, जन औषधि केंद्रों पर 1200 से अधिक जेनेरिक दवाएं होनी चाहिए।
शुरुआत में जन औषधि केंद्रों पर दवाइयों की भरमार थी। मरीज व तीमारदारों को भी इसका फायदा मिल रहा था, लेकिन सरकार की योजना पर दवा की कमी और सरकारी व निजी डॉक्टरों के कमीशन का खेल व्यवस्था को पलीता लगा रहा है। इन केंद्रों का संचालन शुरू होने के बाद भी निजी व सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टरों ने कमीशनखोरी के चलते जेनेरिक के बजाए ब्रांडेड दवाएं लिखना जारी रखा है। इसके चलते जन औषधि केंद्रों संचालकों का खर्चा तक नहीं निकल पा रहा है। इसी वजह से प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर ताला लटक गया है। वहीं, जिला अस्पताल स्थित जन औषधि केंद्रों पर दर्द की गोली, स्प्रे, कैल्शियम की सिरप और विटामिन की दवा भी नहीं हैं।
कारगार हैं जेनेरिक दवाएं
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चरन सिंह ने बताया कि जेनेरिक दवाएं कारगर हैं। ब्रांडेड दवा की तरह ही यह जेनेरिक दवा भी काम करती हैं। फर्क इतना है कि ब्रांडेड दवाओं की मार्केटिंग ज्यादा होती है। इसलिए लोगों को लगता है कि वह दवा ज्यादा कारगर है। जेनेरिक दवा भी उसी तरह काम करती है, जैसे ब्रांडेड दवाएं। लोगों में भ्रम रहता है कि ब्रांडेड दवाएं ज्यादा बेहतर हैं लेकिन ऐसा है नहीं।
जन औषधि केंद्र पर दवाओं का भंडारण में कमी आ रही है, क्योंकि कंपनी द्वारा कुछ दवाएं समय से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। जिसके कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर पर जाकर महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है। अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है, जिससे मरीजों को जन औषधि केंद्र का पूरा लाभ मिल सके।
- गौरव कुमार, संचालक, जन औषधि केंद्र
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गजरौला: जन औषधि केंद्र पर नहीं दस तरह की दवाइयां
नगर के मोहल्ला बस्ती स्थित सहकारी समिति के बाहरी छोर पर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र है। जिसकी शुरुआत पिछले साल पांच अक्तूबर को सांसद चौधरी कंवर सिंह तंवर, स्थानीय विधायक राजीव तरारा ने कमिश्नर व डीएम की मौजूदगी में की थी। इस पर 50 प्रतिशत की छूट पर दवाइयां मिलती हैं। लेकिन, लोगों को जरूरत के हिसाब से दवाइयां मुहैया नहीं हो पा रही हैं। पिछले दिनों एक सप्ताह तक करीब 70 तरह की दवाइयों का टोटा था। अब लखनऊ से दवाइयां तो मिल गई हैं, लेकिन दस तरह की दवाइयों का अभी भी टोटा है। प्रभारी विजेंद्र सिंह का कहना है कि दस तरह की दवाइयां नहीं हैं। वह भी जल्द मिलने की संभावना है।
हसनपुर : जन औषधि केंद्र में खत्म कई बीमारियों की दवा, मरीज परेशान
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में जन औषधि केंद्र बना हुआ है। जहां पर कई प्रकार की दवाइयां खत्म है। जिससे मरीजों को परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है। यहां पर एटोरवा 40 एमजी नहीं है। यह दवाई कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में काम आती है। इसके अलावा एनाफोर्टन भी खत्म है। यह दवाई प्रेगनेंसी महिलाओं को पेन किलर में काम आती है। इसके अलावा पैंटॉप एलएस और पोषण पाउडर यह दवाई पिछले कई दिन से खत्म है। संचालक विकास कुमार का कहना है कि जल्द ही दबाव मंगवाई जाएंगी।
एक महीने से नहीं शुगर की दवा
राजस्व निरीक्षक पद से सेवानिवृत नौबहार सिंह मधुमेह की बीमारी से पीड़ित हैं। वह सोमवार को शुगर की दवा लेने जन औषधि भंडार पर आए थे। लेकिन शुगर की दवा नहीं थी। उन्होंने बताया कि बीते एक माह से उनको जन औषधि की शुगर की दवा नहीं मिल रही है। मजबूरी में महंगी दवा खरीदनी पड़ रही है।
करीब दो माह से हृदयरोग, शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्राल, खून पतला करने व आंखों की ड्राॅप समेत करीब 20 प्रकार की दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई बार इन दवाओं के ऑर्डर दिए हैं। ग्राहकों के वापस चले जाने की वजह से दुकान का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा है।
- सुरेंद्र शर्मा, जन औषधि केंद्र, संचालक
कोट
जिला अस्पताल से बच्चे की दवाई लेने के लिए आई हूं। अस्पताल में दवाई नहीं मिलने पर चिकित्सक ने जन औषधि केंद्र से दवाई लेने को कहा। लेकिन प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर भी बच्चे की दवाई नहीं मिली।
-अफरोज, इस्लाम नगर अमरोहा
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मेरा बेटा कार्तिक पिछले तीन दिनों से जिला अस्पताल में भर्ती है। चिकित्सक ने बच्चे में कैल्शियम की कमी बताई है। जिसको दूर करने के लिए सीरप लिखे हैं। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से सिरप लेने आया हूं, लेकिन यहां पर सिरप नहीं मिला।
- मुकेश कुमार, गजरौला