मंडी धनौरा। रामलीला मैदान पर चल रही रामकथा में सीता स्वयंवर व भगवान राम के विवाह का वर्णन किया गया।
कथावाचक श्रीहित कुलदीप ने कहा कि भगवान राम ने सृष्टि कल्याण के लिए मानव रूप में अवतार लिया था। कथा के दौरान भजनों की संगीतमय प्रस्तुति ने माहौल भक्तिमय कर दिया। शारदे सेवा संस्थान की ओर से आयोजित रामकथा में कथाव्यास ने कहा कि भगवान राम अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वन में चले गए थे। उनके लिए पिता की आज्ञा सबसे बड़ी है। उन्होंने कहा कि आज के युग में लोग थोड़े से लालच में अपने सगे संबंधियों का खून कर देते हैं। वही राम ने अयोध्या जैसे राज्य का त्याग कर दिया।
कथा में सीता स्वयंवर का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भगवान महादेव के दिए धनुष को कोई भी राजा नहीं तोड़ सका तो जनक जी को चिंता होने लगी। उस समय गुरु की आज्ञा पाकर राम ने धनुष को तोड़ दिया था। कथा में भगवान राम के विवाह का प्रसंग सुनाया गया। इस मौके पर कृष्ण गोपाल अग्रवाल, सुभाष बंसल, पवन अग्रवाल, विजय कुमार आदि मौजूद थे। संवाद