मंडी धनौरा(अमरोहा)। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केके सिंह ने कहा कि पशुओं में बढ़ती बांझपन व प्रजनन संबंधी समस्या पशुपालकों के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बनती जा रही है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे अपने पशुओं को संतुलित आहार उपलब्ध कराएं और पशु चिकित्सा वैज्ञानिकों के माध्यम से अल्ट्रासोनोग्राफी व माइक्रोस्कोपी आदि कराएं। वह क्षेत्र के गांव रमपुरा खादर में पशुपालन विभाग की ओर से आयोजित पशु स्वास्थ्य शिविर में अपने विचार रख रहे थे।
कुलपति ने कहा कि पशुओं में बांझपन की समस्या का समय पर उपचार करने से निदान किया जा सकता है। उनका कहना था कि बढ़ती बांझपन व प्रजनन समस्या पशुपालकों के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती है। पशु चिकित्सा मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अमित वर्मा ने जानकारी दी कि खनिज तत्वों की कमी, हीट में नहीं आना, साइलेंट हीट, हार्मोनल असंतुलन, अंडाशय में गांठ, गर्भाशय में संक्रमण, प्रसवोत्तर जटिलताएं व कृत्रिम गर्भाधान में अनावश्यक देरी बांझपन के प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने पशुपालकों को सलाह देते हुए कहा कि पशुपालकों को संतुलित व पोषक आहार के साथ नियमित खनिज मिश्रण अवश्य दें। प्रसव के बाद पशु की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा। शिविर में 175 पशुओं के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। इस मौके पर विधायक राजीव तरारा, डॉ. प्रेम सागर मौर्य, डॉ. विकास सचान, डॉ. भागेश सिंह, डॉ. दीपाक्षी, सचिन कुमार आदि मौजूद थे।