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Amroha News: कई दशक से गंगा के तट पर चल रहा पट्टों का खेल... शिकायतें दबाते रहे अफसर

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संभल/चंदौसी। गंगा की जमीन पर अवैध पट्टे दिए जाने का खेल कई दशक से चल रहा है। इनकी शिकायतें भी दर्ज कराई गईं लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। गुन्नौर तहसील की ग्राम पंचायत रसूलपुर के मजरा गांव हुसैनपुर सैलाब के रकबा होतमगढ़ी खाम में भी अवैध पट्टे किए जाने की शिकायत सामने आई है। पहले भी शिकायतें होती रहीं हैं लेकिन अधिकारी दबाते रहे।
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गांव हुसैनपुर सैलाब निवासी कुंवरपाल और सुगड़पाल ने सीएम को शिकायती पत्र भेजा है। इसमें बताया है कि 1995 में अवैध तरीके से गंगा किनारे किए गए पट्टों की जांच प्रशासन स्तर से नहीं की जा रही है। जबकि गंगा के किनारे की 450 बीघा जमीन पर अवैध पट्टे कर लिए गए हैं। रेत माफिया ने 80 पट्टे कराए थे, जिसमें 40 पट्टे ऐसे नाम से दर्ज हैं जो न गांव में रहते हैं और न उनकी कोई पहचान है।
शिकायतकर्ता कुंवरपाल ने बताया कि 1995 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने गंगा की रेत वाली जमीन की श्रेणी बदली और 80 अवैध पट्टे कर दिए थे। इसमें 40 लोग ऐसे हैं जिनको पट्टे किए ही नहीं जा सकते थे, वह अपात्र थे। बाकी 40 फर्जी नामों पर किए गए। जो फर्जी नामों पर पट्टे किए गए उनमें कुछ को मृतक दिखाकर विरासत में दर्ज करा दिया गया था और कुछ में संशोधन कराकर नाम बदल दिए गए थे। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पट्टे करा रखे हैं।
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जिन पट्टों पर अवैध होने का आरोप, उनमें खनन की अनुमति भी तीन बार दी गई
शिकायतकर्ता कुंवरपाल का कहना है कि जिन पट्टों को अवैध तरीके से किया गया है। प्रशासन स्तर से जांच भी हुई और कई रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया है कि पट्टे अवैध हैं और गंगा किनारे कर दिए गए हैं। उन पट्टों पर रेत के खनन की अनुमति तक जारी की गई। बताया कि वर्ष 2024 में दो अनुमति खनन के लिए जारी हुई थीं। 2025 में एक अनुमति मिली थी जो 26 अप्रैल 2026 को समाप्त हुई है।
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सीएम से लेकर डीएम तक अनगिनत शिकायतें दर्ज कराईं, जांच शुरू होती है लेकिन फिर दब जाती है
शिकायतकर्ता का कहना है कि वह सीएम से लेकर डीएम स्तर पर अनगिनत शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। शिकायत के बाद जांच होती है और पट्टे अवैध भी मान लिए जाते हैं लेकिन फिर जांच को दबा दिया जाता है। शिकायतकर्ता ने तत्कालीन एसडीएम की रिपोर्ट भी सीएम को भेजी है। जिसमें उन्होंने पट्टे अवैध होने का उल्लेख किया है। इसके बाद भी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती। शिकायतकर्ता का कहना है कि कुछ दिन पहले गुन्नौर एसडीएम के पास पहुंचे थे और पट्टों की जानकारी दी थी। जिसमें एसडीएम ने कहा कि यह जमीन तो सरकारी है और सरकार खुद देख लेगी।
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सरकारी जमीन के मामले में दर्ज हुई थी रिपोर्ट, गिरफ्तारी कोई नहीं हुई
23 फरवरी 2026 को गुन्नौर कोतवाली में सुगड़पाल सिंह की तहरीर पर पांच नामजद व एक अज्ञात के खिलाफ सरकारी जमीन पर कब्जा करने व अन्य गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस रिपोर्ट दर्ज होने के बाद न कोई गिरफ्तारी हुई और न कार्रवाई आगे बढ़ी। बल्कि आरोपी हाईकोर्ट से स्टे ले आए। इस कार्रवाई में सवाल यह उठता है कि जब जमीन सरकारी है तो शिकायतकर्ता की तहरीर पर रिपोर्ट क्यों दर्ज की गई। जबकि यह रिपोर्ट हल्का लेखपाल की तहरीर पर दर्ज की जानी थी। जिससे प्रभावी कार्रवाई हो पाती। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने सीएम को शिकायत की थी। उसमें आदेश हुआ तो पुलिस ने उनकी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की। जबकि यह सरकारी कर्मचारी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की जानी थी।
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