अमरोहा। रमजान माह के अलविदा जुमे की नमाज रोजेदारों ने काली पट्टी बांधकर अकीदत के साथ अदा की। नमाज पढ़ने के लिए नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। बारगाह-ए-इलाही अलविदा के सजदे में अमनो अमान के लिए हजारों हाथ उठे।
उलमा ने तकरीर में जकात का महत्व बताया। उलमा ने कहा कि अगर ईद की नमाज से पहले सदका-ए फितर अदा न किया तो रोजे कबूल नहीं होंगे। गरीब, यतीम के चेहरे पर खुशियां लाएं। उसके बाद ही रमजान का मकसद पूरा हो सकता है। जुमा अलविदा की तैयारियां छोटी ईद जैसी की गईं थीं। सुरक्षा के लिहाजा से मस्जिदों के आसपास पुलिस फोर्स तैनात रही।
नमाज शांतिपूर्ण संपन्न होने पर ही पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली। मुकद्दस रमजान माह के चौथे शुक्रवार यानी जुमा अलविदा की तैयारियों में रोजेदार सुबह से नमाज की तैयारियों में जुटे रहे। दोपहर बारह बजने के बाद रोजेदारों ने मस्जिदों का रुख कर लिया। दोपहर डेढ़ बजे तक ज्यादातर मस्जिदों में नमाज संपन्न हुई।
मस्जिदें नमाजियों से खचाखच भरी रहीं। सुरक्षा के लिहाजा से पुलिस के कड़े बंदोबस्त रहे। सबसे अधिक भीड़ जामा मस्जिद में देखने को मिली। शहर की जामा मस्जिद के अलावा जिले की प्रमुख मस्जिदों के आस-पास पुलिस बल की तैनाती रही। प्रशासन की सख्ती के चलते जिले में कहीं भी सड़क पर नमाज अदा नहीं की गई।
अधिकांश रोजेदार वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ काली पट्टी बांधे हुए थे। शहर की जामा मस्जिद में मुफ्ती मोहम्मद जाहिद ने नमाज पढ़ाई। शिया जामा मस्जिद में मौलाना डाॅ. एहसन अख्तर सरोश ने नमाज अदा कराई। मस्जिद तख्त सुलेमान