अमरोहा। पैगम्बरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा की वफात और नवासा-ए रसूल हजरत इमाम हसन अल. की शहादत के सिलसिले में शहर में जगह-जगह शबीहे ताबूत बरामद किए गए। मजलिसों में शहादत का वाकया सुनकर अजादारों की आंखें नम हो गईं।
मोहल्ला काजी गली में जहांगीर अली जैदी की ओर से आयोजित मजलिस में सोज-ओ-सलाम मुदस्सिर अली खां ने पेश किया। मजलिस को मौलाना शादाब हैदर ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि हजरत मोहम्मद साहब की जिंदगी हमें सच्चाई और इंसानियत का रास्ता दिखाती है। अल्लाह के रसूल ने अपनी पूरी जिंदगी को दीन को फरोग देने के लिए कुर्बान कर दिया। दुनिया को इंसानियत का रास्ता दिखाया। उनके नवासों ने अपने दुश्मनों से भी हुस्ने सुलूक से पेश आकर इस्लाम की जो तस्वीर पेश की वह खुद में एक मिसाल है। इसके बाद शबीहे ताबूत बरामद हुआ।
अंजुमनों ने हाय रसूले खुदा-हाय इमामे हसन नौहा पेश करते हुए मातम किया। मजलिस के बाद अंजुमन बनी हाशिम, अंजुमन सादात-ए-अमरोहा और गुलजारे हैदरी ने मातम किया। अजाखाना दोस्त अली हाउस मोहल्ला कटकुई में आयोजित मजलिस में मौलाना उरूज जौनपुरी ने हजरत इमाम हसन की शहादत का बयान पेश किया। जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं। शहर की फिजा में मातम की गमगीन सदाओं के बीच मजलिस का सिलसिला जारी रहेगा।
ईद मिलादुन्नबी जुलूस के लिए बनाई रूपरेखा
हसनपुर।
ईद मिलादुन्नबी को लेकर शुक्रवार को नगर की गढ़ी वाली मस्जिद में जश्ने ईद मिलादुन्नबी कमेटी की बैठक आयोजित हुई। इसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इस वर्ष का ईद मिलादुन्नबी का पांच या छह सितंबर को निकाला जाएगा। जुलूस की तारीख चांद दिखने के बाद अंतिम रूप से तय की जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता कारी अनीस और कारी राहत ने की जबकि संचालन की जिम्मेदारी रईस पहलवान ने संभाली। कमेटी के सदर मोहम्मद अंसार अहमद ने बताया कि इस बार जुलूस को और भी बेहतर सुविधाओं और तैयारियों के साथ निकालने की योजना है। जुलूस हैबतपुर मार्ग स्थित शाह विलायत साहब की जियारत से शुरू होगा और यह नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए खानजादा साहब की जियारत पर जाकर संपन्न होगा। इस दौरान ईदवा खां, रईस पहलवान, अजमल खां, गुल मोहम्मद खां, सदर अंसार अहमद, जनरल सेक्रेटरी बाबर खां, नायब सदर अकील पहलवान, नौशाद खां, मोहम्मद अजीम सलमानी मौजूद रहे। संवाद