अमरोहा। सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की सरकार की मुहिम बैंकों की लेटलतीफी के कारण परवान नहीं चढ़ पा रही है। इसकी वजह से बैंकों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित पड़े हैं। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार बैंकों को ऋण के लिए 3301 आवेदन भेजे गए थे जिनमें से 799 युवाओं को ही लोन मिल सका है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की स्थापना के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं के तहत 10 से 20 लाख रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है लेकिन नए उद्योग लगाने की कोशिश में जुटे युवाओं को बैंकों के ऋण देने में आनाकानी करने से योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। आवेदन के बाद भी महीनों तक फाइलें बैंकों में धूल फांकती रहती हैं। इसके बाद उन्हें अलग-अलग कारण बताते हुए अस्वीकृत कर दिया जा रहा है।
बैंक में लोन के लिए आवेदन करने वाले युवाओं की मानें तो कई बार चक्कर लगाने के बाद भी उनका लोन स्वीकृत नहीं किया जाता है। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले को इस बार 1800 लक्ष्य के सापेक्ष 3828 आवेदन मिले थे। इनमें से 3301 आवेदन बैंकों में भेजे गए थे जिसमें से केवल 799 युवाओं को लोन मिल सका है।
1800 युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य
योजना के तहत जिले में इस साल 1800 युवाओं का स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य मिला है जबकि पिछले साल एक हजार युवाओं का लक्ष्य दिया गया था लेकिन बैंकों की उदासीनता युवाओं को इंतजार करा रही है।
लगातार हो रही समीक्षा
योजना की प्रगति के लिए डीएम लगातार हर माह समीक्षा कर बैंकों को निर्देश देतीं हैं लेकिन इसके बारे भी बैंकों की स्थिति ठीक नही है। लगातार समीक्षा के बाद भी बैंकों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित चल रहे हैं।
इस तरह से बैंक कर रहे परेशान
आवेदक राशिद कुरेशी ने बताया कि बैंक आसानी से युवाओं की फाइलों स्वीकृत नहीं कर रहे है। इससे आवेदक कभी बैंकों तो कभी जिला उद्योग केंद्र के चक्कर काट रहे है। आरोप है कि इसमें बैंक मैनेजर और फील्ड ऑफिसर का खेल है। उनके मुताबिक अगर साठगांठ हो गई तो ठीक वरना दूसरा खेल शुरू कर देते हैं। बैंक की ओर से ऋण आवेदकों को फोन किया जाता है कि वह किसी दूसरी बैंक में दूसरा खाता खुलवा लें इस बैंक से ऋण स्वीकृत नहीं हो पाएगा। इसको लेकर युवाओं का युवा उद्यमी बनने से सपना टूटता नजर आ रहा है।
बैंकों के साथ लगातार समन्वय कर युवाओं को योजना का लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। - शैलेंद्र सिंह, उपायुक्त, उद्योग