हसनपुर (अमरोहा)। हसनपुर क्षेत्र में लोगों को छुट्टा पशुओं के आतंक से आजाद करवाने की मुहिम चार दिन बाद ही दम तोड़ गई। टीम ने चार दिन अभियान चलाया और सिर्फ 27 छुट्टा पशुओं को पकड़कर खानापूर्ति कर दी, जिससे स्थिति ढाक के तीन पात जैसी है। अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों और सड़कों पर छुट्टा पशु मौत बनकर घूम रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।
हसनपुर क्षेत्र में पिछले तीन साल में सांड़ 12 से अधिक लोगों की जान ले चुके हैं। हर घटना के बाद प्रशासन छुट्टा पशुओं के आतंक से निजात दिलाने का आश्वासन तो देता है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। सप्ताहभर पहले आदमपुर थाना क्षेत्र के गांव दमगड़ा में चारपाई पर सो रही गांव निवासी विद्यावती को सांड़ ने घर में घुसकर पटक-पटक कर मार डाला था।
घटना के बाद ग्रामीणों की नाराजगी देखकर प्रशासन हरकत में आया और पशु चिकित्सा विभाग की ओर से चार दिन तक छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए हसनपुर और आदमपुर क्षेत्र में अभियान चलाया गया। टीम ने अभियान के दौरान करनखाल गांव से 10, आदमपुर से 13, दमगड़ा से दो और फूलपुर बीझलपुर से दो छुट्टा पशुओं को पकड़कर गोशाला भेजा, जिससे क्षेत्रवासियों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह अभियान चार दिन चलाने के बाद शुक्रवार को बंद कर दिया। नतीजा, हिंसक सांड़ अभी भी आबादी वाले इलाकों में मौत बनकर घूम रहे हैं। इससे हर समय राहगीर और स्थानीय लोग दहशत में हैं।