राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़े कंटेनर में पीछे से घुसने के कारण हादसे का शिकार हुई डबल डेकर गजरौला तक पांच सौ किमी की दूरी तय कर बेरोक टोक चली आई। क्षमता से अधिक सवारी वाली बस को हाईवे पर न तो किसी थाना पुलिस ने रोका और न ही कहीं पर एआरटीओ ने चेक किया।
गोंडा के चोटीपुर से गोंडा व बहराइच के मजदूरों को लेकर हरियाणा के अंबाला को चली डबल डेकर में भूसे की तरह ठूंस कर लादा गया था। एआरटीओ एके सिंह राजपूत के मुताबिक बस में ऊपर और नीचे 20 स्लीपर थे, जबकि पीछे की तरफ दस सीट थीं। एक स्लीपर पर दो ही यात्रियों को बिठाया जा सकता है, जबकि सीट पर सिर्फ एक यात्री के बैठने की अनुमति होती है। इस तरह बस में 50 ही मजदूर बैठने चाहिए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बस में मजदूरों को इस तरह लादा गया था कि एक दूसरे से सटे हुए थे। हादसे के बाद 26 घायलों को तो पुलिस ने सीएचसी में ही भर्ती करा दिया था, जबकि तकरीबन 60-65 लोग मामूली रूप से घायल तो हुए थे, लेकिन उनको सीएचसी ले जाने की जरूरत नहीं पड़ी। बस में कम से कम 40 लोग क्षमता से अधिक सवार थे। इसके बावजूद गोंडा से चली बस बिना रोक टोक 497 किमी की दूरी तय कर गजरौला तक पहुंच कर हादसे का शिकार हो गई। इसमें दिलचस्प बात यह है कि हाईवे पर ओवरलोड बस को कहीं पर किसी थाना पुलिस ने नहीं रोका। कई जिलों को पार कर आई बस को किसी एआरटीओ ने भी चेक नहीं किया। लोगों में चर्चा है कि पुलिस और परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से ओवरलोड डग्गामार बेरोकटोक दौड़ रही हैं। एआरटीओ प्रवर्तन एके सिंह राजपूत का कहना है कि उन्होंने रात दो बजे तक हाईवे पर खुद चेकिंग अभियान चलाया था, लेकिन यह बाद में आई होगी।
हादसे के बाद उन्होंने मुआयना किया। बस का परमिट, फिटनेस, कागजात देखे। बस का बीमा 29 सितंबर-22 तक का, परमिट सितंबर-2026, फिटनेस भी अप्रैल-2023 तक की है। प्रदूषण के कागजात भी सही थे। बस में 15-20 यात्री क्षमता से अधिक थे। इतना कभी कभार चालक सवारियों की हालत को देख मानवता के नाते कर लेते हैं-एके सिंह राजपूत, एआरटीओ प्रवर्तन