कोरोना संक्रमण के बाद दो साल बाद स्कूलों में पूरी तरह पढ़ाई व्यवस्था पटरी पर लौटने लगी है। काफी समय बाद ऑनलाइन से ऑफलाइन मोड में ट्रांसफर हुई शिक्षा को लेकर बच्चों छात्रों में उत्साह का माहौल बना है। नए सत्र में बच्चों की उपस्थिति संख्या में इजाफा हुआ है। कोरोना काल के दौरान में झिझके बच्चे अब बेझिझक स्कूल पहुंच रहे हैं। वहीं स्कूलों में भी बच्चों के भीतर उत्साह भरने के लिए माहौल बनाया जा रहा है।
कोरोना महामारी ने दो साल तक बच्चों की शिक्षा को प्रभावित किया। ऑनलाइन क्लासों ने बच्चों का स्कूल का माहौल ही छीन लिया था। दो साल बाद कोरोना संक्रमण को खतरा कम हुआ तो अब स्कूलों में बच्चों ने फिर से आना शुरू कर दिया है। स्कूल पहले ही तरह खुल गए हैं। लंबे समय बाद स्कूल खुलने पर बच्चों में हिचक देखी जा रही थी। अब धीरे-धीरे स्कूलों में पढ़ाई का माहौल बनना शुरू हो रहा है। स्कूलों में सुंदर वातावरण तैयार किया गया है। परिषदीय स्कूलों में जहां दीवारों पर मन भावन पेंटिंग हुई हैं, वहीं टाईल्स से स्कूल को सजाया गया है। सीबीएसई बोर्ड और मान्यता प्राप्त स्कूल भी बच्चों को लेकर अपने आपको अपडेट करने में लगे हैं। ऐसा वातावरण बनाया जा रहा है कि बच्चों को स्कूल आकर अच्छा लगे। घर पर सही तरीके से पढ़ाई नहीं हो पाने के कारण विद्यार्थियों में उत्साह भी देखने को मिल रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में तेजी से बच्चों की संख्या बढ़ रही है। बच्चों को स्कूल में लिखने का अभ्यास कराया जा रहा है।
प्राथमिक विद्यालय की शिक्षक रामवीर सिंह ने बताया कि दो साल बाद स्कूलों में पढाई शुरू हुई तो बच्चों में काफी झिझक रही थी। शुरू में बहुत कम आए, अब संख्या बढ़ गई है। धीरे-धीरे बच्चों का पढ़ाई का माहौल वापस लौट रहा है। पढ़ाई को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
शिक्षक नीरज चौहान का कहना है कि दो साल में बच्चों का ध्यान पढ़ाई से हटा गया। उनकी लिखने की प्रेक्टिस छूट गई है। अब स्कूल में लगातार प्रैक्टिस कराई जा रही है। स्कूल आने से पहले बच्चों का पढ़ाई से हटा ध्यान लौटने लगा है। कुछ दिन में पहले जैसी स्थिति में आ जाएंगे।