सत्याग्रह एक्सप्रेस ट्रेन में सामान्य कोच का टिकट होने के बावजूद स्लीपर कोच में सफर कर रहे बिहार के मजदूर को रेलवे स्टेशन पर टिकट निरीक्षक ने पकड़ लिया। उसके खिलाफ कार्रवाई होने से डरी पत्नी और सास चलती ट्रेन से कूद कर घायल हो गईं। रेलवे स्टेशन पर अधिकारी व कर्मचारी सकते में आ गए। तुरंत घायलों को सीएचसी में भर्ती कराया गया।
आरपीएफ दरोगा तुरंत घायलों को ई-रिक्शा से स्टेशन लाए और इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना कर दिया। बिहार के जिला बेंतिया के लोरिया थाना क्षेत्र के गांव मलाही टोला निवासी 25 वर्षीय जितेंद्र अपने परिवार सहित हरियाणा में किसान के यहां काम करता है।
छठ पूजा पर बीते महीने वह परिवार सहित गांव चला गया। जहां से सत्याग्रह एक्सप्रेस ट्रेन से शुक्रवार को हरियाणा जा रहा था। साथ में पत्नी अंगरिया देवी और सास कुसुमवती भी थीं। उन पर टिकट सामान्य कोच का था, लेकिन सफर स्लीपर कोच में कर रहे थे। उनका कहना है कि बैठने के लिए जगह नहीं मिलने के कारण वह स्लीपर कोच में बैठ गए।
सुबह एक्सप्रेस ट्रेन गजरौला रेलवे स्टेशन पर पहुंची। इस दौरान यहां एक टिकट निरीक्षक कोच में चढ़ गया और उनके टिकट चेक करने लगा। उसने स्लीपर कोच में सफर कर रहे अंगरिया देवी, कुसुमवती व जितेंद्र को पकड़ लिया। जितेंद्र को नीचे उतार लिया। इस बीच ट्रेन चल पड़ी।
इधर टिकट निरीक्षक ने उस पर सामान्य कोच का टिकट होने के बावजूद स्लीपर कोच में सफर करने के कारण जुर्माना लगाने की बात कही। उधर, चलती ट्रेन में मां-बेटी ने देखा कि जितेंद्र को टीटीई पकड़ कर ले जा रहा है। उनको लगा कि वह जितेंद्र को जेल भेज देगा।
इसी दहशत के चलते मां-बेटी ने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी। जिससे दोनों घायल हो गईं। उनके घायल हो जाने पर स्टेशन के अधिकारी व कर्मचारी दौड़ पड़े। तुरंत घायलों को संभाला और उपचार के लिए सीएचसी में भर्ती कराया। मगर इसकी जानकारी एक आरपीएफ दरोगा को हुई तो वह तुरंत सीएचसी में पहुंचा।
उसने घायलों को सीएचसी से निकाला और ई-रिक्शा में बैठाकर रेलवे स्टेशन ले गया। जहां पर इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन से रवाना कर दिया। इस घटना से हर कोई अचंभित है। उधर पीड़ित परिवार का कहना है कि वह रेलवे के आला अफसरों से घटना की शिकायत करेंगे।