लखनऊ में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रधानाचार्य परम को सम्मानित करते हुए। फाइल फोटो।
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अमरोहा। जिले में इस साल भी कोई शिक्षक राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए चयनित नहीं किए गए हैं। अब तक दो शिक्षकों को राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार मिल चुका हैं यह दोनों महिला शिक्षक हैं, जो फिलहाल जीजीआईसी में कार्यरत हैं। इस साल राज्य स्तरीय पुरस्कार महज एक शिक्षक को मिला है, जो परिषदीय स्कूल के हैं। इंटर कॉलेज और मदरसा के शिक्षकों को पुरस्कार नहीं मिला है।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले शिक्षकों का सम्मान किया जाता है। इसके तहत जिले से लेकर प्रदेश मुख्यालय और नई दिल्ली में कार्यक्रम आयोजित होते हैं। जिले में दो शिक्षकों को राष्ट्रपति के हाथों और तीन को राज्य पुरस्कार मिल चुका हैं। वर्ष 2010 में अरुणा गुप्ता का राज्य पुरस्कार के लिए चयन हुआ। उसके बाद वर्ष 2014 में जिले के तीन शिक्षकों को पुरस्कार मिला, जिसमें जीजीआईसी की जमर्रुद जहां को राष्ट्रपति पुरस्कार मिला, जबकि जीआईसी के प्रधानाचार्य खुर्शीद हैदर जैदी और जब्दा इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य वीरभान सिंह को राज्य पुरस्कार मिला। उसके बाद वर्ष 2016-17 में जीजीआईसी की प्रधानाचार्य राजो देवी राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हुईं। उनके बाद माध्यमिक का कोई शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित नहीं हुआ है। इस साल प्राथमिक स्कूल सुल्तान ठेर के प्रधानाध्यापक राघवेंद्र सिंह को राज्य पुरस्कार मिला है।
राजो देवी ने पढ़ाई के लिए छात्राओं को प्रेरित किया
अमरोहा। राष्ट्रपति से सम्मानित हो चुकीं जीजीआईसी की प्रधानाचार्य राजो देवी ने अथक मेहनत की है। उन्होंने छात्राओं को पढ़ाई के प्रति प्रेरित किया। इतिहास की प्रवक्ता के तौर पर कॅरियर की शुरुआत करने वालीं राजो देवी ने छात्राओं के अभिभावकों को भी समझाया। उन्हें पढ़ाई के महत्व को बताया। इसके बाद महिला अभिभावक तैयार हुईं। कई वर्षों की मेहनत के बाद परिणाम सामने आया है। छात्राएं भी शिक्षा हासिल कीं।
गरीब बच्चों के घर तक गईं जमर्रुद जहां
अमरोहा। राष्ट्रपति के हाथों बेहतर शिक्षण कार्य के लिए पुरस्कृत हो चुकीं जमर्रुद जहां ने बहुत मेहनत की है। जीजीआईसी में उर्दू की प्रवक्ता जमर्रुद जहां ने स्कूल से नाम कटवा चुकीं छात्राओं के परिवार से संपर्क साधा। उन्हें स्कूल भेजने के लिए मनाया। हालांकि महिला अभिभावकों ने आर्थिक तंगी की बात कही। इसके बाद इन्होंने खुद फीस जमा करने की बात कही। इसके बाद छात्राएं स्कूल में दोबारा लौटीं। उन्होंने नामांकन कराया। उन्हें बाकायदा पढ़ाया। इसके अलावा फीडबैक भी लेती रहीं।
22 राज्यों में लागू है परम सिंह का नवाचार
हसनपुर। क्षेत्र के सुखदेवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य परम सिंह के नवाचार शिक्षा के मॉडल को 22 राज्यों में लागू किया गया। प्रधानाचार्य परम सिंह ने अपने विद्यालय में वर्ष 2011-12 में नवाचार संकल्प लागू कर दिया था। जिसकी वजह से विद्यालय की शिक्षा में लगातार गुणवत्ता में सुधार हुआ। बेहतर नवाचार के लिए 20 नवंबर 2016 को लखनऊ लोकभवन में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें सम्मानित किया था। 13 मार्च 2019 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से उन्हें सम्मानित किया गया।